
श्री हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान शुरू हुआ एक मामूली पार्किंग विवाद अब दो राज्यों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उत्तराखंड और पंजाब प्रशासन की सक्रियता के बीच निहंग श्रद्धालुओं ने फिलहाल दो दिन का इंतजार करने का फैसला किया है, जबकि सभी की नजर अब सरकार के अगले कदम पर टिकी है।
पार्किंग विवाद से बढ़ा तनाव
करीब 10 दिन पहले उत्तराखंड के करणप्रयाग में श्री हेमकुंड साहिब यात्रा पर जा रहे पंजाब के निहंग श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच पार्किंग को लेकर विवाद हुआ था। समय के साथ यह मामला बढ़ता गया और तनावपूर्ण स्थिति बन गई। गुरुवार रात हालात ऐसे बने कि कुल्हाल बॉर्डर कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा।
देहरादून में देर रात चली बातचीत
बॉर्डर पर करीब तीन घंटे तक आवाजाही प्रभावित रहने के बाद निहंग श्रद्धालु देहरादून पहुंचे, जहां उत्तराखंड प्रशासन ने देर रात उनसे बातचीत की। अधिकारियों ने पूरे मामले के समाधान और गिरफ्तार किए गए चार निहंग सिंहों की रिहाई के संबंध में दो दिन का समय मांगा। बातचीत के बाद निहंग श्रद्धालुओं ने फिलहाल संयम बरतने का फैसला किया।

पांवटा साहिब में रुका निहंग जत्था
शुक्रवार दोपहर के बाद निहंग श्रद्धालुओं का जत्था हिमाचल प्रदेश के गुरु गोविंद सिंह गुरुद्वारा, पांवटा साहिब पहुंचा। यहां लगभग 300 से 350 श्रद्धालु ठहरे हुए हैं। निहंगों का कहना है कि वे अगले दो दिनों तक यहीं रुकेंगे और उसके बाद उत्तराखंड सरकार के फैसले के आधार पर अपनी अगली रणनीति तय करेंगे।
बॉर्डर पर फिर सामान्य हुआ यातायात
शुक्रवार को कुछ समय के लिए कुल्हाल बॉर्डर पर यातायात फिर रोका गया, लेकिन स्थिति सामान्य होने के बाद मार्ग खोल दिया गया। जिन लोगों को वैकल्पिक रास्तों की जानकारी थी, उन्होंने दूसरे मार्गों से यात्रा जारी रखी। शाम तक देहरादून, यमुनानगर और चंडीगढ़ की ओर यातायात सामान्य रूप से संचालित होने लगा।
वीडियो संदेश में कही यह बात
पांवटा साहिब पहुंचने के बाद निहंग श्रद्धालुओं ने एक वीडियो संदेश जारी कर बताया कि उत्तराखंड सरकार ने दो दिन के भीतर गिरफ्तार चार निहंग सिंहों से मुलाकात कराने और दोनों पक्षों के बीच समझौते की दिशा में प्रयास करने का भरोसा दिया है। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
प्रशासन की नजर पूरे घटनाक्रम पर
जिला सिरमौर के पुलिस अधीक्षक निश्चित सिंह नेगी ने बताया कि हिमाचल प्रदेश की सीमा में यातायात पूरी तरह सामान्य है और सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। अब सभी की नजर उत्तराखंड सरकार के अगले फैसले पर है, जिससे इस पूरे विवाद का समाधान निकलने की उम्मीद की जा रही है।
