
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि छात्रों की मांगों का समाधान बातचीत से होना चाहिए, बल प्रयोग से नहीं।
छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल
अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इसकी तुलना दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलनों के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई से की।
दीपके का सवाल है कि जब छात्र अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रहे हों, तो उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस कार्रवाई क्यों की जाती है। हालांकि, पुलिस कार्रवाई से जुड़े इन दावों पर संबंधित प्रशासन का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
CJP ने आंदोलन को समर्थन देने की बात कही
CJP संस्थापक ने झारखंड के छात्र आंदोलन को अपना पूरा समर्थन देने की बात कही है। उनके मुताबिक, संगठन की टीम मौके पर मौजूद है और आंदोलन के दौरान घायल हुए छात्रों की मदद कर रही है।
उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों का समाधान पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों का व्यवस्था पर भरोसा बना रहे।

15 अगस्त से सरकारी स्कूलों पर फोकस
छात्र आंदोलन के साथ ही CJP ने ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को लेकर राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। इसकी शुरुआत 15 अगस्त से महाराष्ट्र के हिंगोली स्थित दीपके के गांव से होगी।
अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं की स्थिति जांचने और स्थानीय स्तर पर सुधार की पहल करने पर जोर दिया जाएगा। संगठन का दावा है कि ग्रामीण स्कूलों में अभी भी कई जगह जरूरी सुविधाओं की कमी है।
अभिभावक करेंगे स्कूलों का सोशल ऑडिट
CJP ने अभिभावकों से अपने बच्चों के सरकारी स्कूलों का सोशल ऑडिट करने की अपील की है। इसके तहत बिजली, पीने का पानी, शौचालय और मध्याह्न भोजन जैसी सुविधाओं की स्थिति जांचने को कहा गया है।
संगठन जल्द एक प्रिंटेबल ऑडिट फॉर्म जारी करने की बात भी कह रहा है। अभिभावक स्कूल की स्थिति दर्ज करने के साथ जरूरत पड़ने पर वीडियो और तस्वीरों के जरिए समस्याओं को सामने ला सकेंगे।
‘सरपंच चैलेंज’ से गांवों में सुधार की कोशिश
अभियान में ग्राम पंचायतों के सरपंचों को भी जोड़ा जाएगा। CJP ने ‘सरपंच चैलेंज’ शुरू करने की घोषणा की है। संगठन के अनुसार, जो सरपंच अपने गांव के सरकारी स्कूल में सुधार की पहल करेंगे, उन्हें सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाएगा।
‘पहले और बाद’ की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करने का विचार भी रखा गया है। उद्देश्य यह है कि एक गांव का बेहतर स्कूल दूसरे गांवों के लिए उदाहरण बने।
गांव के बच्चों को भी मिलें बेहतर सुविधाएं
दीपके का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले किसानों और मजदूरों के बच्चों को भी अच्छी शिक्षा और सम्मानजनक सुविधाएं मिलनी चाहिए। उनका सवाल है कि अगर देश बड़े-बड़े आधुनिक प्रोजेक्ट बना सकता है, तो गांवों के स्कूलों को बेहतर बनाने में कमी क्यों रहे?
छात्र आंदोलन से लेकर ग्रामीण स्कूलों तक, CJP का अभियान शिक्षा और युवाओं के मुद्दों को केंद्र में रखने का दावा करता है। अब देखना होगा कि यह पहल कितनी जमीन पर उतरती है और अभिभावकों, सरपंचों तथा स्थानीय प्रशासन की इसमें कितनी भागीदारी होती है। क्योंकि बदलाव केवल नारों से नहीं, बल्कि स्कूल की कक्षा, पानी, शौचालय और बच्चों के सुरक्षित भविष्य तक पहुंचने वाली ठोस कार्रवाई से दिखाई देता है।
