
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने शुक्रवार को चुनाव आयोग पर चल रही बहस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा होता है, तो इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
चिराग के मुताबिक, चुनाव आयोग और खासकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जिम्मेदारी है कि वह उठ रहे सवालों पर मजबूती से अपना पक्ष जनता के सामने रखें। उन्होंने कहा कि इससे लोगों के मन में किसी तरह का संदेह नहीं रहना चाहिए।
विपक्ष के आरोपों से अलग EC की जिम्मेदारी
चिराग ने कहा कि विपक्ष का राजनीति करना उसका काम है, लेकिन चुनाव आयोग का काम लोगों का भरोसा बनाए रखना है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब निर्वाचन आयोग के भीतर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मतभेद और चुनावी प्रक्रिया पर राजनीतिक सवाल चर्चा में हैं।
यहां चिराग का जोर किसी पक्ष के समर्थन या विरोध से ज्यादा चुनावी संस्थान की ओर से स्पष्ट संवाद पर रहा।
बिहार की घटनाओं पर जताई चिंता
चिराग पासवान ने बिहार के जमुई और समस्तीपुर में छात्राओं से जुड़ी घटनाओं पर भी चिंता जताई। जमुई मामले में पुलिस ने सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद कार्रवाई की और आरोपियों को गिरफ्तार किया। समस्तीपुर मामले में भी चार लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
25 सितंबर को बांका के मंदार पर्वत से भी एक कथित घटना का वीडियो सामने आया। पुलिस ने छह अज्ञात युवकों के खिलाफ FIR दर्ज की है। हालांकि पुलिस का कहना है कि वीडियो की वास्तविक तारीख की भी जांच की जा रही है।

बोले- केवल गिरफ्तारी से नहीं रुकेगा अपराध
चिराग ने कहा कि इन मामलों में कार्रवाई जरूरी है, लेकिन केवल गिरफ्तारियां या पुलिस कार्रवाई से ऐसी घटनाएं पूरी तरह नहीं रुकेंगी। उन्होंने उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जरूरत बताई जिनकी जिम्मेदारी वाले इलाके में ऐसी घटनाएं होती हैं।
उनका कहना था कि कानून का डर अपराधियों के मन में होना जरूरी है और प्रशासन को जवाबदेही से बचना नहीं चाहिए।
समस्तीपुर सांसद पर आरोपों से भी विवाद
समस्तीपुर की घटना को लेकर सांसद शांभवी चौधरी भी राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। RJD नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि उन्होंने पुलिस की प्रेस रिलीज साझा करते समय आरोपियों के नाम वाले हिस्से को क्रॉप किया। यह आरोप तेजस्वी ने लगाया है; इसकी राजनीतिक व्याख्या को तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
चिराग ने इस विवाद पर सीधे प्रतिक्रिया देने के बजाय जमुई और समस्तीपुर में हुई पुलिस कार्रवाई का उल्लेख किया।
कानून-व्यवस्था पर सरकार की परीक्षा
चिराग ने कहा कि उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री से भी इन घटनाओं को लेकर बात की है और ऐसे मामलों में जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाने की जरूरत बताई है। उनके बयान से साफ है कि वह सरकार में रहते हुए भी प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा उठा रहे हैं।
चुनावी भरोसे से लेकर कानून-व्यवस्था तक, चिराग के ताजा बयान में दो अलग मुद्दे जरूर हैं, लेकिन दोनों के केंद्र में एक ही सवाल है—जनता का भरोसा कैसे कायम रखा जाए और संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी कितनी पारदर्शिता से निभाती हैं।
