
उत्तर प्रदेश में गोमूत्र खरीद को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सरकार की पहल पर सवाल उठाते हुए रोजगार, महंगाई और किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता देने की मांग की। उनके बयान के बाद योजना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं।
गोमूत्र खरीद योजना पर कांग्रेस का हमला
उत्तर प्रदेश सरकार की गोमूत्र खरीद से जुड़ी पहल पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “बस इसी काम पर रह गए… रोजगार भी दोगे कि नहीं।”
मसूद का कहना है कि सरकार को ऐसे मुद्दों के बजाय बेरोजगारी, महंगाई और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
‘फोडर स्कैम से भी बड़ा स्कैम’
कांग्रेस सांसद ने योजना पर सवाल उठाते हुए इसे लेकर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी प्रक्रिया और इससे जुड़े खर्च की जांच होनी चाहिए।
इमरान मसूद ने इसे “फोडर स्कैम से भी बड़ा स्कैम” तक बता दिया। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आरोप है और सरकार की ओर से ऐसी किसी तुलना या आरोप को लेकर प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
वहीं, सरकार की ओर से गोमूत्र खरीद की पहल को पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम बताया जा रहा है।

रोजगार और महंगाई पर फोकस की मांग
इमरान मसूद ने कहा कि प्रदेश के युवाओं के सामने रोजगार सबसे बड़ा सवाल है। किसानों को भी कई तरह की आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने सरकार से महंगाई कम करने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर ध्यान देने की मांग की। उनके मुताबिक, जनता की प्राथमिक जरूरतों को राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में रखा जाना चाहिए।
अमित शाह पर भी साधा निशाना
कांग्रेस सांसद ने दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल बयान देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि किसी भी कार्रवाई को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाया और पूछा कि इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
झारखंड छात्र आंदोलन पर क्या बोले?
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन पर भी मसूद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी इस मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
उनका कहना है कि छात्रों की मांगों को बातचीत के जरिए सुना जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि झारखंड सरकार छात्रों की समस्याओं पर संवाद कर समाधान निकालने की कोशिश करेगी।
‘छात्रों की आवाज दबाई जा रही’
इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं के मुद्दों को गंभीरता से सुनना जरूरी है।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई बाहरी ताकत आंदोलन को प्रभावित करने की कोशिश करती है तो इससे छात्रों के वास्तविक मुद्दे कमजोर पड़ सकते हैं।
गोमूत्र खरीद से लेकर रोजगार और छात्र आंदोलनों तक, इमरान मसूद के बयानों ने उत्तर प्रदेश की सियासत में कई मुद्दों को एक साथ बहस के केंद्र में ला दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इन राजनीतिक आरोपों का क्या जवाब देती है और गोमूत्र खरीद की पहल का वास्तविक असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर कितना दिखाई देता है।
