
पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान की चर्चाओं के बीच विधायकों की कथित गुप्त बैठक और राहुल गांधी को लिखी चिट्ठी ने सियासी हलचल बढ़ा दी। अब बरनाला विधायक कुलदीप सिंह ढिल्लों ने सामने आकर कहा है कि इसमें कोई गोपनीयता नहीं थी और मकसद पार्टी को मजबूत करना है।
‘सीक्रेट मीटिंग’ पर विधायक की सफाई
बरनाला से कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह ढिल्लों ने विधायकों की कथित ‘सीक्रेट मीटिंग’ और राहुल गांधी को भेजी गई चिट्ठी को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि कोई गुप्त बैठक नहीं हुई थी और न ही किसी नेता के खिलाफ कोई गोपनीय पत्र लिखा गया।
ढिल्लों के मुताबिक, विधानसभा सत्र के दौरान विधायक नियमित रूप से मिलते थे। इसी दौरान कुछ विधायकों ने राहुल गांधी से मुलाकात की इच्छा जताई और सामूहिक रूप से समय मांगने का फैसला किया।
2027 चुनाव को लेकर मार्गदर्शन की जरूरत
विधायक ने कहा कि पंजाब कांग्रेस में चल रहे कुछ मुद्दों पर वरिष्ठ नेतृत्व के सामने अपनी बात रखना जरूरी है। इसके साथ ही 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति को लेकर राहुल गांधी से मार्गदर्शन लेने की इच्छा भी है।

उन्होंने साफ किया कि चिट्ठी में किसी नेता के खिलाफ शिकायत नहीं है और इसका उद्देश्य कांग्रेस के भीतर कोई तीसरा गुट खड़ा करना भी नहीं है।
‘मौका मिला तो खुलकर बात करेंगे’
कुलदीप ढिल्लों ने कहा कि पार्टी से जुड़े कुछ विषय ऐसे होते हैं, जिन्हें सार्वजनिक मंच पर विस्तार से नहीं रखा जा सकता। अगर राहुल गांधी मुलाकात का समय देते हैं तो विधायक पार्टी की बेहतरी से जुड़े मुद्दों पर उनके सामने खुलकर अपनी बात रखेंगे।
उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें यह जानकारी नहीं है कि राहुल गांधी ने विधायकों को मिलने के लिए बुलाया है या नहीं। उनका सीधा जवाब था—“अगर बुलाएंगे तो जाएंगे, नहीं तो अपना काम कर रहे हैं।”
पंजाब प्रभारी से भी हुई है बातचीत
ढिल्लों ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं है कि पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल ने विधायकों की बात नहीं सुनी। विधायकों ने उनके सामने भी अपनी चिंताएं और सुझाव रखे हैं।
हालांकि, उनका कहना है कि किसी भी कार्यकर्ता या विधायक की इच्छा हो सकती है कि वह राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता से सीधे मिलकर अपनी बात रखे। इसे पार्टी विरोधी गतिविधि के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
‘कांग्रेस में इंटरनल डेमोक्रेसी है’
पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी के सवाल पर ढिल्लों ने कहा कि पार्टी में इंटरनल डेमोक्रेसी है और हर नेता को अपनी बात रखने की आजादी है। उन्होंने माना कि नेतृत्व को लेकर मतभेद होना राजनीति में असामान्य नहीं है।
पंजाबी कहावत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जहां दो बर्तन होते हैं, वहां टकराने की आवाज भी आती है। लेकिन उनका दावा है कि कांग्रेस में नेतृत्व की कमी नहीं है और सभी नेताओं का लक्ष्य पंजाब में पार्टी की सरकार बनाना है।
चिट्ठी CLP लेटरहेड पर लिखी गई
राहुल गांधी को भेजी गई चिट्ठी को लेकर ढिल्लों ने एक अहम बात कही। उनके मुताबिक, यह किसी एक नेता की व्यक्तिगत चिट्ठी नहीं बल्कि विधायकों का साझा पत्र है। पत्र CLP लीडर के लेटरहेड पर लिखा गया है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी चाहें तो विधायकों से सामूहिक रूप से मिल सकते हैं या एक-एक करके बातचीत कर सकते हैं। मुलाकात हुई तो सभी विधायक अपनी बात उनके सामने रखेंगे।
क्या यह मतभेद हैं या संगठन की कवायद?
कुलदीप ढिल्लों की सफाई से यह संकेत जरूर मिलता है कि पंजाब कांग्रेस में कुछ मुद्दों को लेकर नेताओं के बीच चर्चा चल रही है। लेकिन इसे खुले विद्रोह या अलग गुट की कोशिश मानना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती है। अब असली सवाल यह है कि राहुल गांधी से मुलाकात होती है तो पंजाब के विधायक किन मुद्दों को उठाते हैं और पार्टी नेतृत्व उन मतभेदों को किस तरह चुनावी रणनीति में बदलता है।
