पंजाब में नशे के खिलाफ सरकार का नया कदम, 21,850 शिक्षकों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

पंजाब सरकार ने नशे के खिलाफ अपनी मुहिम को अब स्कूलों तक और मजबूती से पहुंचाने की तैयारी की है। ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत 12 जिलों में शिक्षकों के लिए जागरूकता और क्षमता विकास कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसका लक्ष्य 21,850 से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षित करना है, ताकि वे विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और नशे की शुरुआती आशंकाओं को समय रहते पहचान सकें।
फाजिल्का और तरनतारन से शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत फाजिल्का और तरनतारन से हुई, जहां पिछले सप्ताह 800 से अधिक शिक्षकों ने प्रशिक्षण कार्यशालाओं में हिस्सा लिया। सरकार का मानना है कि शिक्षक बच्चों के साथ सबसे ज्यादा समय बिताते हैं। ऐसे में वे तनाव, व्यवहार में बदलाव या नशे की ओर बढ़ते रुझान को शुरुआती स्तर पर पहचानने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
सीमावर्ती जिलों पर खास नजर
पंजाब में नशे की समस्या को देखते हुए सीमावर्ती जिलों को इस अभियान में विशेष प्राथमिकता दी गई है। इससे पहले जनवरी में नौ जिलों के स्कूल प्रिंसिपलों और हेडमास्टरों के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया गया था। अमृतसर में हुए पायलट कार्यक्रम में 2,800 से अधिक शिक्षक शामिल हुए थे।

शिक्षक सीखेंगे कैसे करें मदद
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के मुताबिक प्रशिक्षण में किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक स्थिति और नशे से जुड़े जोखिमों पर ध्यान दिया जाएगा। शिक्षकों को यह भी सिखाया जाएगा कि किसी परेशान विद्यार्थी को केवल सजा देने के बजाय संवेदनशीलता से उसकी बात सुनी जाए और जरूरत पड़ने पर उसे उचित सहायता तक पहुंचाया जाए।
12 जिलों में 500 से ज्यादा बैच
फाजिल्का और तरनतारन के बाद फिरोजपुर, गुरदासपुर, पठानकोट, श्री मुक्तसर साहिब, फरीदकोट, मोहाली, रोपड़, कपूरथला, लुधियाना और पटियाला में प्रशिक्षण का विस्तार होगा। अगस्त 2026 से 12 जिलों में 500 से अधिक बैच आयोजित किए जाने की योजना है। प्रत्येक शिक्षक को विद्यार्थियों के बीच नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी भी दी जाएगी।
बच्चों तक पहुंचेगी मुहिम
इस पहल की सबसे बड़ी ताकत यही है कि नशा विरोधी संदेश केवल पोस्टर या सरकारी अभियान तक सीमित न रहकर सीधे कक्षा तक पहुंचेगा। अगर शिक्षक किसी बच्चे के व्यवहार में बदलाव को समय रहते समझ पाते हैं और परिवार व विशेषज्ञों तक मदद पहुंचा पाते हैं, तो समस्या गंभीर होने से पहले हस्तक्षेप संभव है। पंजाब सरकार की यह रणनीति नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल कानून-व्यवस्था का विषय न मानकर शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से जोड़ने की कोशिश है।
