
बिहार बीजेपी के प्रदेश नेतृत्व ने इस बार संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए सत्ता से जुड़े नेताओं को लगभग किनारे कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की नई टीम में इस बार विधायकों और एमएलसी की संख्या बेहद सीमित रखी गई है। सिर्फ दो विधायक ही टीम में जगह बना पाए हैं। इनमें से एक विधायक त्रिविक्रम सिंह को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इस बदलाव को संगठन को मजबूत करने और जमीनी कार्यकर्ताओं को आगे लाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
पूर्व टीम की तुलना में बदली राजनीतिक संरचना
अगर पिछली टीम पर नजर डालें तो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल की टीम में एक सांसद और दो एमएलसी शामिल थे। इसके अलावा तीन विधायकों को भी प्रदेश मंत्री बनाया गया था, जिनमें रत्नेश कुशवाहा और संजय गुप्ता जैसे नाम शामिल थे। वहीं धर्मशीला गुप्ता सांसद होने के बावजूद संगठन का हिस्सा थीं। लेकिन इस बार की टीम में सत्ता और विधायिका से जुड़े चेहरे लगभग गायब हैं, जिससे संगठन में बड़ा बदलाव साफ दिखाई दे रहा है।

अनुभवी और संघर्षशील कार्यकर्ताओं को मिली जगह
नई टीम में पार्टी ने अनुभवी, संघर्षशील और लंबे समय से संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी है। तीन पूर्व विधायकों हरिभूषण ठाकुर बचौल, पवन जायसवाल और प्रणव यादव को प्रदेश संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी का कहना है कि यह फैसला संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल के अनुसार यह टीम भाजपा की सामाजिक प्रतिबद्धता और सर्वस्पर्शी सोच को दर्शाती है।
सामाजिक संतुलन और प्रतिनिधित्व पर विशेष ध्यान
नई टीम में सामाजिक समीकरणों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग से 17 सदस्यों को शामिल किया गया है। वहीं दलित समाज से चार प्रतिनिधियों को जगह दी गई है, जिनमें पासी, रविदास, पासवान और धोबी समाज के सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा नौ महिलाओं को भी संगठन में स्थान दिया गया है, जो पिछली तुलना में अधिक है। सवर्ण समाज से 16 कार्यकर्ताओं को भी टीम में शामिल किया गया है, जिससे संगठन में संतुलन बनाने की कोशिश साफ नजर आती है।
