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बिश्केक SCO बैठक में राजनाथ सिंह की कूटनीतिक सक्रियता कई देशों से अहम मुलाकातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की बैठक से इतर कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। इस दौरान उन्होंने चीन, रूस और बेलारूस के रक्षा मंत्रियों के साथ अलग अलग बैठकों में हिस्सा लिया। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और रणनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। भारत अपनी रक्षा कूटनीति को मजबूत करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की दिशा में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

चीन के रक्षा मंत्री से बातचीत एलएसी पर शांति पर रहा फोकस

राजनाथ सिंह की सबसे अहम मुलाकात चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून के साथ हुई। इस बैठक में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर शांति और स्थिरता बनाए रखने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने सीमा क्षेत्रों में तनाव कम करने और आपसी विश्वास बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर भी विचार साझा किए गए जिसमें पश्चिम एशिया में बदलते हालात प्रमुख रहे। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि भारत और चीन के बीच संबंधों में हाल के समय में सुधार की कोशिशें चल रही हैं।

बिश्केक SCO बैठक में राजनाथ सिंह की कूटनीतिक सक्रियता कई देशों से अहम मुलाकातें

रूस और बेलारूस के साथ रक्षा सहयोग पर हुई अहम चर्चा

इसके बाद रक्षा मंत्री ने रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलोसोव से मुलाकात की जिसमें द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। विशेष रूप से एस 400 वायु रक्षा प्रणाली की आपूर्ति और अन्य रक्षा परियोजनाओं पर बातचीत हुई। रूस भारत का एक पुराना रक्षा साझेदार रहा है और दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग लंबे समय से जारी है। इसके साथ ही राजनाथ सिंह ने बेलारूस के रक्षा मंत्री लेफ्टिनेंट जनरल विक्टर के साथ भी बैठक की जिसमें रक्षा सहयोग और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ाने पर सहमति बनी। भारत ने बेलारूस के साथ क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण को सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया।

भारत की बहुस्तरीय रक्षा कूटनीति और क्षेत्रीय संतुलन की रणनीति

इन सभी बैठकों से यह स्पष्ट होता है कि भारत अपनी रक्षा और कूटनीतिक नीति में बहुस्तरीय दृष्टिकोण अपना रहा है। किर्गिज और कजाख समकक्षों के साथ भी राजनाथ सिंह ने अलग अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं जिनमें क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग पर चर्चा हुई। भारत का उद्देश्य न केवल अपनी सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करना है बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग को भी बढ़ावा देना है। SCO जैसे मंच पर भारत की सक्रिय भागीदारी यह संकेत देती है कि देश वैश्विक कूटनीति में एक मजबूत और संतुलित भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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