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India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका व्यापार डील की उल्टी गिनती शुरू! क्या ऊर्जा के मोर्चे पर होगी क्रांति?

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका इस महीने के अंत तक एक लाभकारी व्यापार समझौते (BTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में तेज़ी से काम कर रहे हैं। यह समझौता 29 मार्च को तय किए गए द्विपक्षीय ढांचे के अंतर्गत होगा। इस प्रस्तावित समझौते के तहत दोनों देशों के बीच ऊर्जा आयात-निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन यह किसी भी देश को किसी तीसरे देश से तेल और गैस खरीदने से नहीं रोकेगा। यानी भारत, रूस से तेल खरीदना जारी रख सकता है।

टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर बनी सहमति, बातचीत के कई दौर पूरे

29 मार्च को नई दिल्ली में हुई पहली आमने-सामने की बातचीत के दौरान दोनों देशों ने व्यापार समझौते के लिए “टर्म्स ऑफ रेफरेंस” (TOR) को अंतिम रूप दिया। इसके बाद 22 अप्रैल को भारत यात्रा पर आए अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने TOR की औपचारिक घोषणा की और इसे “निर्यात पर अंतिम समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम” बताया। TOR के तहत अब तक पांच आमने-सामने की बैठकें और कई वर्चुअल बातचीत हो चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार, इन चर्चाओं में इतनी प्रगति हुई है कि अब एक अंतरिम समझौते की घोषणा संभव है।

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अगस्त में दिल्ली आएगी अमेरिकी टीम, सुलझ सकते हैं बचे हुए मुद्दे

सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में बातचीत वर्चुअल मोड में चल रही है और बचे हुए मतभेदों को अमेरिका की टीम की भारत यात्रा के दौरान हल किए जाने की उम्मीद है। अमेरिकी टीम 24 अगस्त को नई दिल्ली पहुंचेगी और 25 अगस्त से बातचीत का छठा चरण शुरू होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दौर के अंत तक कुछ ठोस परिणाम सामने आ सकते हैं, हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया तीखे बयानों से माहौल थोड़ा तनावपूर्ण हुआ है। ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर 25% टैरिफ लगाने और रूस से तेल खरीदने पर ‘अनडिक्लेयर ड्यूटी’ लगाने की बात कही थी।

रूस से तेल आयात पर भारत का साफ रुख: ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि

ट्रंप की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि भारत एक तिहाई कच्चा तेल रूस से आयात करता है, जो अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद जारी है। फरवरी 2025 की अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में भारत के कुल तेल और कंडेन्सेट आयात का 39% हिस्सा रूस से, 19% इराक से, 16% सऊदी अरब से, 5% यूएई से और 4% अमेरिका से था। भारत प्रतिदिन लगभग 4.5 मिलियन बैरल तेल और कंडेन्सेट आयात करता है और अपनी जरूरत का 87% से अधिक तेल आयात करता है। एक सरकारी सूत्र ने कहा, “भारत के लिए सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति प्राथमिकता है। रूस से मिलने वाला सस्ता कच्चा तेल इसी जरूरत को पूरा करता है। अमेरिका से आयात बढ़ा है और आगे और बढ़ सकता है, लेकिन रूस से आयात किसी बाहरी दबाव में नहीं रोका जाएगा।”

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