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महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस का बड़ा पलटवार 29 शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने के बाद देश की राजनीति में टकराव और तेज हो गया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए बुधवार को देश के 29 प्रमुख शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का ऐलान किया है। पार्टी की ओर से वरिष्ठ नेता विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर विधेयक से जुड़े अपने पक्ष को जनता के सामने रखेंगे और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाएंगे। कांग्रेस का कहना है कि वह इस मुद्दे को केवल संसद तक सीमित नहीं रखेगी बल्कि जनसंपर्क अभियान के जरिए जनता तक लेकर जाएगी।

सुप्रिया श्रीनेत ने पीएम मोदी के संबोधन पर उठाए गंभीर सवाल

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर सवाल खड़े करते हुए इसे राजनीतिक दबाव और घबराहट से जोड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर विभाजनकारी परिसीमन की दिशा में आगे बढ़ना चाहती थी। कांग्रेस का कहना है कि पार्टी महिला आरक्षण को बिना किसी शर्त के वर्तमान 543 सीटों के आधार पर तुरंत लागू करने की मांग कर रही है। साथ ही यह भी कहा गया कि महिलाओं को एक तिहाई यानी 181 सीटों का वास्तविक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए और इसके लिए किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस का बड़ा पलटवार 29 शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस

महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सरकार पर तीखा हमला

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार महिला सशक्तिकरण की बात तो करती है लेकिन वास्तविक रूप से इसे लागू करने में देरी कर रही है। पार्टी का कहना है कि 2023 में पारित विधेयक को अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया और इसमें शर्तें जोड़कर प्रक्रिया को जटिल बनाया गया है। कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि परिसीमन के मुद्दे को लेकर सरकार का रवैया कुछ राज्यों के राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या सरकार सभी राज्यों में समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना चाहती है या फिर राजनीतिक लाभ के अनुसार बदलाव करना चाहती है।

बीजेपी पर महिला प्रतिनिधित्व और सामाजिक मुद्दों को लेकर भी सवाल

कांग्रेस ने बीजेपी पर महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी के अनुसार, वर्तमान में लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है और सरकार के मंत्रिमंडल में भी महिलाओं की संख्या सीमित है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि महिला सुरक्षा से जुड़े कई मामलों जैसे मणिपुर हिंसा, हाथरस और अन्य घटनाओं पर सरकार की प्रतिक्रिया सवालों के घेरे में रही है। इसके अलावा पार्टी ने दावा किया कि पंचायत स्तर पर महिलाओं को जो प्रतिनिधित्व मिला है वह पहले की कांग्रेस सरकारों द्वारा लाए गए संवैधानिक संशोधनों का परिणाम है, जबकि उस समय कई बीजेपी नेताओं ने इसका विरोध किया था।

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