
पांच राज्यों के चुनाव परिणाम सामने आने के बाद Indian Union Muslim League एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। केरल और तमिलनाडु में पार्टी की भूमिका बेहद अहम हो गई है, जहां सरकार गठन में उसकी भागीदारी निर्णायक मानी जा रही है। केरल में कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता में आने की संभावनाएं बन रही हैं, वहीं तमिलनाडु में पार्टी का झुकाव Tamilaga Vettri Kazhagam की ओर दिखाई दे रहा है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, IUML को केरल में 22 और तमिलनाडु में 2 सीटों पर जीत मिली है, जिससे वह दोनों राज्यों में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आ गई है।
IUML का इतिहास और दक्षिण भारत में मजबूत पकड़
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का राजनीतिक इतिहास काफी पुराना है और यह पार्टी 1948 से दक्षिण भारत की राजनीति में सक्रिय रही है। 1951 में इसने भारतीय संविधान को स्वीकार किया और तब से यह लगातार केरल और तमिलनाडु में अपनी उपस्थिति बनाए हुए है। वर्तमान में पार्टी के अध्यक्ष K. M. Kader Mohideen हैं, जो पहले सांसद भी रह चुके हैं। पार्टी का चुनाव चिन्ह सीढ़ी है और इसका मुख्य आधार मुस्लिम समुदाय के बीच मजबूत पकड़ है। अतीत में Muhammad Ismail और G. M. Banatwalla जैसे नेताओं ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

केरल और तमिलनाडु में IUML की निर्णायक भूमिका
2026 के चुनाव में IUML ने केरल में 22 सीटें जीतकर खुद को सत्ता समीकरण का अहम हिस्सा बना लिया है। 140 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 71 सीटों की जरूरत होती है, जबकि कांग्रेस के पास 63 सीटें हैं। ऐसे में IUML का समर्थन सरकार गठन के लिए बेहद जरूरी हो गया है। तमिलनाडु में भी पार्टी ने 2 सीटें जीतकर महत्वपूर्ण भूमिका हासिल की है, जहां 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है। यहां TVK को 107 सीटें मिली हैं, जिससे साफ है कि IUML और कांग्रेस का समर्थन सरकार बनाने के लिए अहम साबित होगा।
ओवैसी की पार्टी के मुकाबले कांग्रेस को मिला नया सहारा
राष्ट्रीय राजनीति में All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen के बढ़ते प्रभाव के बीच IUML का उभरना कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के लिए राहत की खबर माना जा रहा है। AIMIM ने कई राज्यों में विपक्षी वोटों को प्रभावित किया है, जिससे कांग्रेस को नुकसान हुआ है। ऐसे में IUML का मजबूत प्रदर्शन मुस्लिम बहुल इलाकों में इंडिया गठबंधन के लिए संतुलन बनाने का काम कर सकता है। आने वाले समय में यह पार्टी न केवल दक्षिण भारत बल्कि अन्य राज्यों में भी गठबंधन की रणनीति में अहम भूमिका निभा सकती है।
