
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भारतीय जनता पार्टी पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा है कि अब बीजेपी को रोकने की जिम्मेदारी पंजाब की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पंजाब कोई ट्रक नहीं है जिसे कोई भी मोड़ दे। मान ने कहा कि जब भी देश पर संकट आता है तो पंजाब सबसे आगे खड़ा होता है। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि पार्टी पंजाब को लेकर गलतफहमी में है और बार बार धमकी देती है कि अगला नंबर पंजाब का है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब का कोई नंबर नहीं होता और यहां की जनता हर चुनौती का जवाब देना जानती है।
बीजेपी पर पंजाब के हक को नजरअंदाज करने का आरोप
सीएम भगवंत मान ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि उसने कभी भी पंजाब के अधिकारों की खुलकर बात नहीं की। उन्होंने कहा कि बीजेपी लगातार उनकी सरकार को कमजोर करने की कोशिश कर रही है और ऑपरेशन लोटस जैसे हथकंडों का इस्तेमाल कर रही है। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि बीजेपी अन्य राज्यों में दागी और बागी नेताओं को शामिल करके उनके खिलाफ चल रहे मामलों को खत्म कर देती है। मान ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक बताया और कहा कि ऐसी राजनीति देश के लिए सही संकेत नहीं देती।

धमकियों पर सीएम का जवाब, पंजाब देगा मजबूत प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी की धमकियों को पंजाब के लोग कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यहां की जनता प्यार से सब कुछ सह लेती है लेकिन अगर कोई अकड़ दिखाता है तो उसका जवाब पांच गुना ताकत से दिया जाता है। मान ने साफ किया कि पंजाब में कानून और संविधान के खिलाफ कोई भी कदम नहीं चलने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीजेपी यह सोचती है कि उसके प्रभाव से केस खत्म हो सकते हैं लेकिन पंजाब में ऐसा संभव नहीं है। यहां कानून सबके लिए बराबर है और कोई भी इससे ऊपर नहीं है।
राष्ट्रपति से मुलाकात और संवैधानिक मुद्दे पर उठाए सवाल
सीएम भगवंत मान ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा है जिस पर 95 विधायकों के हस्ताक्षर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राज्यसभा सांसदों ने असंवैधानिक तरीके से पार्टी बदलकर बीजेपी जॉइन की और इसे विलय बताया गया। मान ने कहा कि संविधान के अनुसार विलय तभी माना जाता है जब दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित हो। कुछ चुनिंदा सांसदों द्वारा लिया गया यह कदम लोकतंत्र के लिए खतरा है। उन्होंने राष्ट्रपति से इस मामले में उचित कार्रवाई करने की मांग की और कहा कि यह संविधान की रक्षा का सवाल है।
