
बिहार भाजपा में संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। सम्राट कैबिनेट विस्तार के बाद प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की नई टीम का खाका लगभग तैयार माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व की ओर से संगठन को और मजबूत करने के लिए व्यापक मंथन चल रहा है। इस नई संरचना में युवा और अनुभवी नेताओं के संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि संगठन को नई ऊर्जा और गति मिल सके।
पहली बार 33 प्रतिशत महिला भागीदारी पर जोर
भाजपा इस बार अपने संगठन में महिलाओं की भागीदारी को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है। पहली बार प्रदेश संगठन में 33 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की पहल की जा रही है। सबसे अहम बात यह है कि इस बार सांसद, विधायक या विधान पार्षद की जगह जमीनी स्तर पर सक्रिय महिला कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि संगठन में असली ताकत कार्यकर्ताओं से आती है, न कि केवल जनप्रतिनिधियों से।

महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की रणनीति
नई टीम में महिला प्रतिनिधित्व को 12 से 14 तक बढ़ाए जाने की संभावना जताई जा रही है, जबकि वर्तमान में यह संख्या आठ के आसपास है। संगठन में लगभग 50 प्रतिशत नए चेहरों को जगह देने की भी तैयारी है, जिससे नई सोच और ऊर्जा का संचार हो सके। इसके साथ ही जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को भी ध्यान में रखा जा रहा है ताकि हर वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके। यह बदलाव संगठन को अधिक समावेशी और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महिला मतदाताओं पर फोकस
भाजपा इस बदलाव के जरिए न केवल संगठन को मजबूत करना चाहती है, बल्कि महिला मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ भी और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए पार्टी उन्हें निर्णय प्रक्रिया में अधिक भूमिका देना चाहती है। वर्तमान में प्रदेश संगठन में छह महिलाएं विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं, जिनमें उपाध्यक्ष, महामंत्री और मंत्री स्तर के पद शामिल हैं। अब सभी की नजरें नई संगठनात्मक घोषणा पर टिकी हैं, जो आगामी चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभा सकती है।
