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यूरोप के छोटे देश स्लोवाकिया पर क्यों बढ़ी भारत की नजर? प्रधानमंत्री मोदी की पहली द्विपक्षीय यात्रा के मायने

प्रधानमंत्री Narendra Modi के आगामी यूरोप दौरे में फ्रांस के साथ-साथ स्लोवाकिया का पड़ाव भी खास महत्व रखता है। 13 से 18 जून तक प्रस्तावित इस दौरे के दौरान मोदी पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री के रूप में स्लोवाकिया की द्विपक्षीय यात्रा करेंगे। भले ही यह देश आकार और आबादी के लिहाज से छोटा हो, लेकिन भारत की विदेश नीति और आर्थिक रणनीति में इसकी अहमियत लगातार बढ़ रही है।

मध्य यूरोप में स्थित Slovakia की आबादी लगभग 55 लाख है, लेकिन औद्योगिक उत्पादन और विनिर्माण क्षमता के मामले में यह यूरोप के प्रमुख देशों में गिना जाता है। खासकर ऑटोमोबाइल सेक्टर में स्लोवाकिया की मजबूत पहचान है। प्रति व्यक्ति कार उत्पादन के मामले में यह लंबे समय से दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल रहा है और कई वैश्विक वाहन निर्माता कंपनियों के बड़े उत्पादन केंद्र यहां संचालित होते हैं।

भारत के लिए स्लोवाकिया इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में अपनी भूमिका मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, मशीन निर्माण और उन्नत औद्योगिक तकनीकों जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

यह यात्रा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने यूरोप के साथ अपने संबंधों का दायरा पारंपरिक साझेदार देशों तक सीमित रखने के बजाय मध्य और पूर्वी यूरोप के देशों तक भी विस्तार किया है। फ्रांस, जर्मनी और इटली के अलावा अब स्लोवाकिया जैसे देशों के साथ रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

स्लोवाकिया की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वह European Union और NATO दोनों का सदस्य है। ऐसे में उसके साथ मजबूत संबंध भारत को मध्य यूरोप में अपनी उपस्थिति बढ़ाने और यूरोपीय बाजारों तक बेहतर पहुंच बनाने में मदद कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत उन देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है जो निवेश, तकनीक, नवाचार और औद्योगिक विकास के नए अवसर प्रदान कर सकें। स्लोवाकिया इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभर रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा इस बात का संकेत मानी जा रही है कि भारत अब यूरोप में नए साझेदारों और नए अवसरों की तलाश को लेकर पहले से कहीं अधिक सक्रिय और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपना रहा है। स्लोवाकिया के साथ बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में भारत-यूरोप संबंधों को नई दिशा दे सकता है।

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