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भारत के आमों का दुनिया में जलवा: UAE से लेकर ब्रिटेन तक तोतापुरी, दशहरी और लंगड़ा की जबरदस्त मांग

भारत को आमों का देश कहा जाता है और यहां उगने वाली आम की सैकड़ों किस्में दुनिया भर में अपनी मिठास, स्वाद और गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध हैं। अल्फांसो, दशहरी, लंगड़ा, केसर, तोतापुरी और बंगनपल्ली जैसे भारतीय आमों की मांग न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश होने के साथ-साथ प्रमुख निर्यातकों में भी शामिल है।

दुनिया में आम की 1,500 से अधिक किस्में पाई जाती हैं, जिनमें से 1,000 से ज्यादा किस्में अकेले भारत में उगाई जाती हैं। हालांकि व्यावसायिक स्तर पर लगभग 30 किस्मों का ही बड़े पैमाने पर उत्पादन और निर्यात किया जाता है। भारतीय आमों की गुणवत्ता और प्राकृतिक स्वाद ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में खास पहचान दिलाई है।

भारत से सबसे अधिक आम आयात करने वाला देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) है। भारतीय आम निर्यात में UAE की हिस्सेदारी 31.16 प्रतिशत है। यहां अल्फांसो, केसर, बंगनपल्ली और तोतापुरी किस्मों की सबसे ज्यादा मांग रहती है। इसके बदले भारत को लगभग 16.28 मिलियन डॉलर का राजस्व प्राप्त होता है।

इस सूची में दूसरे स्थान पर ब्रिटेन है, जहां भारतीय अल्फांसो, केसर और लंगड़ा आम बेहद लोकप्रिय हैं। भारतीय आम निर्यात में ब्रिटेन की हिस्सेदारी 19.27 प्रतिशत है। वहीं अमेरिका 17.72 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है, जहां अल्फांसो, केसर और दशहरी आमों की भारी मांग देखी जाती है।

खाड़ी देशों में भी भारतीय आमों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। कुवैत, सऊदी अरब, कतर और ओमान जैसे देशों में तोतापुरी, अल्फांसो और बंगनपल्ली आमों की विशेष मांग रहती है। वहीं कनाडा और सिंगापुर जैसे देशों में भी भारतीय आम उपभोक्ताओं की पहली पसंद बने हुए हैं।

हालांकि हाल ही में जापान और नेपाल ने कुछ तकनीकी और गुणवत्ता संबंधी कारणों से भारतीय आमों के आयात पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया है। जापान ने पेस्ट कंट्रोल प्रक्रियाओं में कमियों का हवाला दिया, जबकि नेपाल ने एक खेप में अत्यधिक कीटनाशक अवशेष मिलने के बाद आयात पर रोक लगाई। इसके बावजूद वैश्विक बाजार में भारतीय आमों की लोकप्रियता पर कोई खास असर नहीं पड़ा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय आमों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग किसानों और निर्यातकों के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकती है। यदि गुणवत्ता मानकों और निर्यात प्रक्रियाओं को और मजबूत किया जाए तो आने वाले वर्षों में भारतीय आमों का निर्यात कई गुना बढ़ सकता है।

भारत के तोतापुरी, लंगड़ा, दशहरी, अल्फांसो और केसर जैसे आम आज दुनिया के कई देशों में भारतीय कृषि की पहचान बन चुके हैं। स्वाद, सुगंध और गुणवत्ता के दम पर भारतीय आम लगातार वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

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