
बिहार विधानसभा चुनाव केवल राजनीतिक मुकाबला नहीं था, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी बेहद बड़ा अभियान साबित हुआ। ADR की ताजा रिपोर्ट ने चुनावी फंडिंग और खर्च से जुड़े ऐसे आंकड़े सामने रखे हैं, जो राजनीतिक दलों की चुनावी रणनीति और संसाधनों के इस्तेमाल की तस्वीर साफ करते हैं।
चुनावी फंडिंग का बड़ा खुलासा
Association for Democratic Reforms (ADR) की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेने वाली 10 प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने कुल 281.32 करोड़ रुपये का चंदा जुटाया। वहीं इन दलों ने चुनाव प्रचार और अन्य गतिविधियों पर 193.47 करोड़ रुपये खर्च किए।
रिपोर्ट बताती है कि जुटाए गए फंड और घोषित खर्च के बीच करीब 88 करोड़ रुपये का अंतर रहा, जिसने राजनीतिक फंडिंग को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
प्रचार पर सबसे ज्यादा खर्च
चुनावी खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा प्रचार पर गया। राजनीतिक दलों ने प्रचार गतिविधियों पर लगभग 100.43 करोड़ रुपये खर्च किए, जो कुल व्यय का 36.68 प्रतिशत है। रैलियां, जनसभाएं, प्रचार सामग्री और मीडिया कैंपेन इस खर्च का प्रमुख हिस्सा रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक चुनावों में प्रचार की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है, जिसके कारण इस मद में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

यात्रा पर भी खर्च हुए करोड़ों
प्रचार के बाद दूसरा सबसे बड़ा खर्च यात्रा पर हुआ। रिपोर्ट के अनुसार पार्टियों ने यात्रा और आवागमन पर 79.53 करोड़ रुपये खर्च किए। यह कुल खर्च का लगभग 29 प्रतिशत हिस्सा है। चुनावी मौसम में नेताओं, स्टार प्रचारकों और पार्टी कार्यकर्ताओं की लगातार आवाजाही के कारण यह खर्च स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।
डिजिटल प्रचार का बढ़ता प्रभाव
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म भी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार वर्चुअल प्रचार और डिजिटल कैंपेन पर 13.07 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
यह आंकड़ा दर्शाता है कि राजनीतिक दल अब पारंपरिक प्रचार के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यमों पर भी तेजी से निवेश कर रहे हैं।
उम्मीदवारों और अन्य मदों पर खर्च
राजनीतिक दलों ने उम्मीदवारों को एकमुश्त सहायता के रूप में 62.07 करोड़ रुपये वितरित किए। वहीं आपराधिक रिकॉर्ड से जुड़ी अनिवार्य सूचनाओं के प्रकाशन पर 3.88 करोड़ रुपये और अन्य मदों में 14.80 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
बसपा की रिपोर्ट ने खींचा ध्यान
विश्लेषण में शामिल दलों में Mayawati की Bahujan Samaj Party एकमात्र ऐसी पार्टी रही जिसने बिहार चुनाव के दौरान जुटाए गए फंड की कोई विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। इस तथ्य ने पारदर्शिता को लेकर सवाल भी खड़े किए हैं।
