
हरियाणा के नूंह जिले में अवैध निर्माणों के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 18 एकड़ में विकसित तीन अनधिकृत कॉलोनियों को ध्वस्त कर दिया। बुलडोजर कार्रवाई के दौरान कई निर्माण, सड़कें और अन्य अवैध ढांचे भी हटाए गए, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
अवैध कॉलोनियों पर प्रशासन का बड़ा एक्शन
नूंह प्रशासन ने कंट्रोल्ड एरिया में विकसित की गई अवैध कॉलोनियों के खिलाफ व्यापक ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। अधिकारियों के अनुसार भिरावटी और रिठोरा राजस्व एस्टेट में बिना अनुमति विकसित की गई कॉलोनियों को निशाना बनाया गया। प्रशासन का कहना है कि संबंधित लोगों को पहले नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रखा गया।
भिरावटी में कई निर्माण किए गए ध्वस्त
अधिकारियों के मुताबिक भिरावटी क्षेत्र में लगभग 5 एकड़ भूमि पर विकसित कॉलोनी में कार्रवाई करते हुए छह निर्माणाधीन मकान, कई बाउंड्री वॉल, डीपीसी संरचनाएं और सड़क नेटवर्क को तोड़ा गया। इसके अलावा इसी क्षेत्र में लगभग 10 एकड़ में फैली दूसरी कॉलोनी पर भी बुलडोजर चलाया गया, जहां अवैध निर्माण और सड़क ढांचे हटाए गए।

रिठोरा में भी चला अभियान
राजस्व एस्टेट रिठोरा में करीब 3 एकड़ क्षेत्र में विकसित अवैध कॉलोनी को भी प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान एक प्रॉपर्टी डीलर के कार्यालय सहित अन्य अवैध ढांचों को हटाया गया। बिजली के खंभों और सड़क नेटवर्क को भी हटाने की कार्रवाई की गई।
नियमों के उल्लंघन पर सख्त संदेश
अभियान के बाद अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कंट्रोल्ड एरिया में बिना अनुमति किसी भी प्रकार की कॉलोनी विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे निर्माणों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
खरीदारों के लिए चेतावनी
अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्लॉट या संपत्ति को खरीदने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य करें। प्रशासन ने लोगों को प्रॉपर्टी डीलरों के दावों पर आंख बंद करके भरोसा न करने और संबंधित विभाग से जानकारी लेने की सलाह दी है।
अवैध कॉलोनियां क्यों बनती हैं चिंता का विषय?
विशेषज्ञों के अनुसार अवैध कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं, कानूनी स्वीकृतियों और शहरी नियोजन के मानकों का अभाव होता है। इससे भविष्य में निवासियों को पानी, बिजली, सड़क और संपत्ति अधिकारों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि प्रशासन समय-समय पर ऐसे निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करता है।
