जौनपुर के 22 साल पुराने हत्याकांड में बड़ा फैसला, 4 भाइयों को उम्रकैद

जौनपुर की अदालत के फैसले ने 22 साल पुराने हत्याकांड की लंबी कानूनी कहानी को निर्णायक मोड़ दिया है। जमीन विवाद में दिनदहाड़े हुई हत्या के मामले में चार भाइयों को दोषी ठहराया गया, जबकि दो आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया।
22 साल बाद आया अदालत का फैसला
उत्तर प्रदेश के जौनपुर में 22 साल पुराने हत्या के मामले में अदालत ने चार आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल यादव की अदालत ने राम सेवक मौर्य, अश्वनी मौर्य, पवन मौर्य और मनोज मौर्य को हत्या का दोषी माना। चारों पर 80-80 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
फैसला आने के बाद सभी दोषियों को न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।
दिनदहाड़े गोली मारकर हुई थी हत्या
मामला 16 अगस्त 2004 का है। लाइन बाजार थाना क्षेत्र के मियांपुर मोहल्ले में कचहरी तिराहे के पास आशीष मौर्य की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बताया गया कि हत्या के पीछे जमीन विवाद था।

घटना के बाद लाइन बाजार थाने में सात लोगों के खिलाफ हत्या समेत गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया दो दशक से ज्यादा समय तक चली।
सात आरोपियों में चार दोषी
अभियोजन के मुताबिक, नामजद आरोपियों में चारों मौर्य भाई भी शामिल थे। मामले की सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई। वहीं, अदालत ने दो अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और मामले में उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने चार आरोपियों को हत्या का दोषी माना और उम्रकैद की सजा सुनाई।
मनोज मौर्य के राजनीतिक जुड़ाव को लेकर स्थिति साफ
इस मामले में मनोज मौर्य का नाम इसलिए भी चर्चा में आया है क्योंकि वह वर्तमान में सांसद बाबू सिंह कुशवाहा के प्रतिनिधि हैं। हालांकि, घटना वर्ष 2004 की है और उस समय मनोज मौर्य राजनीति में नहीं थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उस समय उनका बाबू सिंह कुशवाहा से कोई राजनीतिक जुड़ाव भी नहीं था।
इसलिए मौजूदा राजनीतिक भूमिका को पुराने हत्याकांड की घटना से अलग करके देखना जरूरी है।
लंबी चली न्यायिक प्रक्रिया
22 साल तक चले इस मुकदमे में गवाहियों, साक्ष्यों और कानूनी दलीलों के बाद आखिरकार अदालत ने अपना फैसला सुनाया। ऐसे पुराने मामलों में फैसला केवल आरोपियों के लिए नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार के लिए भी बेहद अहम होता है, जो वर्षों तक न्याय की प्रतीक्षा करता है।
अदालत के फैसले के बाद अब मामले में दोषी ठहराए गए चारों आरोपियों के सामने आगे की कानूनी प्रक्रिया का रास्ता खुला है।
न्याय की लंबी राह का अंत
जौनपुर का यह मामला बताता है कि गंभीर अपराधों में न्यायिक प्रक्रिया कितनी लंबी हो सकती है। 16 अगस्त 2004 को हुई हत्या से लेकर अदालत के फैसले तक 22 साल का समय बीत गया।
फैसले ने एक पुराने हत्याकांड को कानूनी निष्कर्ष तक पहुंचाया है, लेकिन यह सवाल भी छोड़ गया है कि गंभीर मामलों में न्याय की प्रक्रिया को और तेज कैसे बनाया जाए।
