नेपाल में भोटेकोशी नदी की भीषण बाढ़ से तबाही, भारत और चीन से मांगी गई मदद

नेपाल में भोटेकोशी नदी की अचानक आई भीषण बाढ़ ने रसुवा समेत कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। सड़क, पुल और बिजली जैसी जरूरी सुविधाएं प्रभावित होने के बीच सरकार ने राहत अभियान तेज किया है और भारत तथा चीन से सहयोग मांगा है।
भोटेकोशी की बाढ़ से मची तबाही
भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले में भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है और लोगों के सामने सुरक्षित स्थान तक पहुंचने की चुनौती खड़ी हो गई है।
रसुवागढ़ी, टिमुरे, स्याफ्रु, मैलुङ और बेत्रावती समेत कई क्षेत्रों में घरों, पुलों, सड़कों और बिजली से जुड़ी संरचनाओं को नुकसान पहुंचने की सूचना है।

प्रधानमंत्री ने बुलाई मंत्रिपरिषद की बैठक
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाई। इसमें प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की गई।
सरकार का मुख्य फोकस प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने और क्षतिग्रस्त इलाकों में जल्द से जल्द सहायता पहुंचाने पर है।
भारत और चीन से मांगा सहयोग
नेपाल सरकार ने राहत और बचाव अभियान के लिए भारत और चीन से आवश्यक सहयोग मांगा है। सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल के अनुसार दोनों पड़ोसी देशों से सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है।
विदेश मंत्री शिशिर खनाल दोनों देशों के अधिकारियों के संपर्क में हैं। ऐसे समय में पड़ोसी देशों की मदद राहत अभियान की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
पांच जिलों में बढ़ सकता है खतरा
बाढ़ का असर केवल रसुवा तक सीमित नहीं माना जा रहा। नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन के नदी तटीय इलाकों में भी खतरे की आशंका जताई गई है।
राजनीतिक दलों ने सरकार से नदी किनारे रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
राजनीतिक दलों ने बढ़ाई सतर्कता की आवाज
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी और नेपाली कांग्रेस ने राहत-बचाव अभियान तेज करने की मांग की है।
कांग्रेस नेता गगन थापा ने सरकार से पूरे राज्य तंत्र को राहत कार्य में लगाने की अपील की। वहीं राजनीतिक दलों ने अपने कार्यकर्ताओं से भी प्रभावित परिवारों की मदद में जुटने को कहा है।
राहत अभियान के सामने बड़ी चुनौती
बाढ़ से सड़क और संपर्क व्यवस्था प्रभावित होने के कारण राहत दलों और सामग्री को प्रभावित इलाकों तक पहुंचाना आसान नहीं है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन और विभिन्न स्तर की सरकारों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होगा।
फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों की जान बचाना और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है। भारत और चीन से मांगी गई मदद अब राहत अभियान को कितनी गति देती है, इस पर प्रभावित इलाकों की नजर टिकी है।
