
पंजाब में बिजली बिलों और 300 यूनिट मुफ्त बिजली की सब्सिडी को लेकर उठे सवालों के बीच मान सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। सरकार के मुताबिक मीटर रीडरों की हड़ताल के कारण कुछ बिल औसत खपत के आधार पर बने, जिससे उपभोक्ताओं को सब्सिडी में परेशानी हुई।
बिजली बिलों को लेकर क्यों उठे सवाल?
पंजाब में कुछ उपभोक्ताओं ने शिकायत की कि उन्हें लगातार तीन महीनों का बिजली बिल एक साथ भेजा गया और 300 यूनिट मुफ्त बिजली योजना का लाभ अपेक्षित तरीके से नहीं मिला। शिकायतें सामने आने के बाद सरकार ने इसके पीछे की वजह बताई है।
मई से जुलाई तक मीटर रीडरों की हड़ताल
कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड के मुताबिक मई, जून और जुलाई के दौरान मीटर रीडरों की हड़ताल रही। इसके कारण कई इलाकों में वास्तविक मीटर रीडिंग नहीं हो सकी। ऐसे में बिजली बिल तैयार करने के लिए पिछले साल की औसत खपत को आधार बनाया गया।
औसत रीडिंग से कैसे हुई परेशानी?
सरकार का कहना है कि औसत खपत के आधार पर तैयार बिलों के कारण कुछ उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली की सब्सिडी का लाभ उस तरीके से नहीं मिल पाया, जैसा योजना के तहत मिलना चाहिए था। कुछ लोगों को लगा कि तीन महीने की खपत जोड़कर एक साथ बिल भेज दिया गया है।

यही वजह है कि बिजली उपभोक्ताओं के बीच भ्रम और शिकायतें बढ़ीं।
300 यूनिट मुफ्त बिजली योजना पर सरकार का जोर
मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया था और पिछले करीब साढ़े चार साल से इस योजना को लागू किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि योजना का लाभ उपभोक्ताओं तक सही तरीके से पहुंचाना उसकी प्राथमिकता है।
जल्द जारी होगा कस्टमर केयर नंबर
सरकार ने संकेत दिया है कि इस समस्या के समाधान के लिए जल्द कस्टमर केयर नंबर जारी किया जाएगा। इसके जरिए उपभोक्ता अपने बिजली बिल, मीटर रीडिंग और सब्सिडी से जुड़ी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
उपभोक्ताओं को अब क्या उम्मीद?
मीटर रीडिंग की व्यवस्था सामान्य होने के बाद वास्तविक खपत के आधार पर बिलिंग में सुधार की उम्मीद है। हालांकि, जिन उपभोक्ताओं को सब्सिडी का लाभ नहीं मिल पाया, उनके मामलों का समाधान कैसे होगा, यह महत्वपूर्ण रहेगा। फिलहाल सरकार की सफाई के बाद निगाह इस बात पर है कि शिकायतों के निपटारे के लिए नई व्यवस्था कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से लागू होती है।
