यूपी में 41 फर्जी आयुर्वेदिक डॉक्टर पकड़े गए, जाली डिग्री से कराया था रजिस्ट्रेशन

उत्तर प्रदेश में फर्जी मेडिकल डिग्री के जरिए मरीजों का इलाज करने का गंभीर मामला सामने आया है। आयुर्वेदिक और यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड की जांच में 41 डॉक्टरों के दस्तावेज संदिग्ध पाए गए हैं। अब इनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की तैयारी है।
41 डॉक्टरों पर FIR की तैयारी
लखनऊ में आयुर्वेदिक और यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड ने 41 डॉक्टरों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी है। आरोप है कि इन लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बोर्ड में रजिस्ट्रेशन कराया और इसके बाद चिकित्सा प्रैक्टिस कर रहे थे।
बोर्ड ने लखनऊ पुलिस को तहरीर देकर इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
BAMS डिग्री और मार्कशीट तक फर्जी
जांच में सामने आया कि आरोपित डॉक्टरों के पास अलग-अलग संस्थानों के नाम से जारी कथित जाली BAMS डिग्री, फर्जी मार्कशीट और इंटर्नशिप सर्टिफिकेट मिले हैं। कुछ मामलों में भारतीय चिकित्सा परिषद, हरियाणा के नाम पर कथित फर्जी NOC भी सामने आई है।

इन दस्तावेजों के आधार पर ही बोर्ड में रजिस्ट्रेशन कराया गया था।
यूनिवर्सिटी ने डिग्री को बताया फर्जी
मामला सामने आने के बाद बोर्ड ने संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन कराया। जांच के दौरान संबंधित विश्वविद्यालयों से इन डिग्रियों की पुष्टि कराई गई। बताया गया कि विश्वविद्यालयों ने कई डिग्रियों को फर्जी बताया।
इसके बाद बोर्ड ने आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस को तहरीर दी है।
15 साल के रजिस्ट्रेशन की होगी जांच
मामला केवल 41 डॉक्टरों तक सीमित नहीं रहने वाला है। बोर्ड ने पिछले 15 वर्षों में रजिस्टर्ड डॉक्टरों की डिग्रियों की जांच के भी आदेश दिए हैं। इससे आने वाले दिनों में फर्जी दस्तावेजों से जुड़े और मामले सामने आने की संभावना है।
यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फर्जी डिग्री के आधार पर चिकित्सा प्रैक्टिस सीधे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।
आयुष बोर्ड में रजिस्ट्रेशन जरूरी
उत्तर प्रदेश में आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा पद्धति से प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों को संबंधित बोर्ड में पंजीकरण कराना होता है। इसके लिए डिग्री, मार्कशीट और अन्य जरूरी दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं।
इसी प्रक्रिया में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।
मंत्री ने जांच को लेकर क्या कहा?
मामले पर योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान बड़े पैमाने पर फर्जी डिग्रियां बांटे जाने का आरोप है और मौजूदा सरकार इन मामलों की जांच करा रही है।
अब पुलिस जांच और 15 साल के पुराने रजिस्ट्रेशन की पड़ताल के बाद यह स्पष्ट होगा कि फर्जीवाड़े का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
