राज्यराजनीति

कानपुर में 6 घंटे तक रेलिंग पर फंदा डालकर बैठा युवक, FIR की कॉपी दिखाने पर नीचे उतरा

कानपुर में मंगलवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब न्याय की मांग को लेकर एक युवक घर की पहली मंजिल की रेलिंग पर फंदा डालकर बैठ गया। करीब छह घंटे तक पुलिस उसे समझाती रही। आखिरकार FIR दर्ज होने और उसकी प्रति दिखाए जाने के बाद युवक नीचे उतरा।

सुबह बालकनी पर फंदा डालकर बैठा युवक

मामला कानपुर दक्षिण कमिश्नरेट के सेन पश्चिम पारा थाना क्षेत्र के न्योरी गांव का है। मंगलवार सुबह करीब छह बजे श्याम सुंदर अपने घर की पहली मंजिल पर पहुंचा और बालकनी की रेलिंग में रस्सी बांधकर गले में फंदा डाल लिया। उसने अपनी पत्नी और तीन बच्चों को घर के अंदर कर मुख्य गेट बंद कर दिया।

न्याय और मुकदमे की मांग पर अड़ा रहा

युवक का कहना था कि उसकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया जाए और उसे न्याय मिले। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और उसे सुरक्षित नीचे उतारने के लिए बातचीत शुरू की। लेकिन श्याम सुंदर अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं था।

कानपुर में 6 घंटे तक रेलिंग पर फंदा डालकर बैठा युवक, FIR की कॉपी दिखाने पर नीचे उतरा

छह घंटे तक चला समझाने का प्रयास

स्थिति गंभीर देखते हुए पुलिस के साथ फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने लगातार युवक से बातचीत की और उसे समझाने का प्रयास किया। इस दौरान उसने कुछ पुराने ऑडियो भी सुनाए और उन्हें अपने आरोपों से जुड़ा साक्ष्य बताया।

एक साल पुराने विवाद का किया जिक्र

श्याम सुंदर ने आरोप लगाया कि करीब एक साल पहले पड़ोसी रामबाबू से उसका विवाद हुआ था। उसके मुताबिक, विवाद के बाद उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। उसने पुलिस पर थाने में मारपीट का आरोप भी लगाया। युवक का दावा है कि उसने अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री के जनता दरबार तक करीब दो दर्जन प्रार्थनापत्र दिए, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

FIR दर्ज हुई तो खत्म हुआ गतिरोध

करीब छह घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद पुलिस ने युवक की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने FIR की प्रति उसे दिखाई। इसके बाद श्याम सुंदर रेलिंग से नीचे उतर आया। इस दौरान पुलिस टीम लगातार उसकी सुरक्षा और स्थिति पर नजर बनाए रही।

कार्रवाई के बाद अब जांच पर निगाह

फिलहाल पुलिस युवक की शिकायत और लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। इस पूरे मामले ने यह भी दिखाया कि लंबे समय से लंबित शिकायतों को लेकर किसी व्यक्ति की निराशा किस तरह गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। अब जरूरी है कि दर्ज मुकदमे की निष्पक्ष जांच हो और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाए।

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