राज्य

दिल्ली-NCR में CNG ऑटो के नए रजिस्ट्रेशन पर रोक, 2028 से शुरू होगा बड़ा बदलाव

दिल्ली-NCR की सड़कों पर आने वाले वर्षों में ऑटो का रंग-रूप बदल सकता है। प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार CNG ऑटो के नए रजिस्ट्रेशन को चरणबद्ध तरीके से रोकने की तैयारी में है। इसके बाद इलेक्ट्रिक ऑटो को परिवहन व्यवस्था में बड़ी जगह मिलने की उम्मीद है।

2028 से पांच शहरों में शुरुआत

प्रस्तावित योजना के अनुसार जनवरी 2028 से नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत में नए CNG ऑटो का रजिस्ट्रेशन बंद किया जा सकता है।

इसका सीधा मतलब यह होगा कि तय तारीख के बाद इन शहरों में नया CNG ऑटो खरीदकर उसका रजिस्ट्रेशन कराने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, इसका असर तुरंत मौजूदा ऑटो पर नहीं पड़ेगा।

मौजूदा CNG ऑटो चलते रहेंगे

नीति का मुख्य फोकस नए रजिस्ट्रेशन को रोकना है। यानी जो CNG ऑटो पहले से सड़कों पर चल रहे हैं, उन्हें सिर्फ इस फैसले के कारण तत्काल हटाया नहीं जाएगा।

दिल्ली-NCR में CNG ऑटो के नए रजिस्ट्रेशन पर रोक, 2028 से शुरू होगा बड़ा बदलाव

यह बदलाव धीरे-धीरे लागू करने की रणनीति का हिस्सा है, ताकि परिवहन व्यवस्था और ऑटो चालकों पर अचानक बड़ा दबाव न पड़े।

2029 में बाकी NCR की बारी

सरकार की प्रस्तावित योजना का दूसरा चरण जनवरी 2029 से शुरू होने की बात कही गई है। इस चरण में NCR के बाकी जिलों में भी नए CNG ऑटो के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने की तैयारी है।

इस तरह अगले कुछ वर्षों में पूरे NCR में नए ऑटो के लिए स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक विकल्पों को प्राथमिकता देने की दिशा में बदलाव किया जा सकता है।

इलेक्ट्रिक ऑटो को मिलेगा बढ़ावा

योजना के तहत आगे नए ऑटो के तौर पर इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की तैयारी है। इसका उद्देश्य पेट्रोल, डीजल और CNG आधारित नए वाहनों की संख्या में धीरे-धीरे कमी लाना है।

इलेक्ट्रिक ऑटो की ओर यह बदलाव दिल्ली-NCR के सार्वजनिक परिवहन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है। हालांकि, चार्जिंग नेटवर्क और वाहन की कीमत जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

प्रदूषण पर लगाम लगाने की कोशिश

दिल्ली-NCR लंबे समय से खराब वायु गुणवत्ता की समस्या से जूझता रहा है। वाहनों से होने वाला उत्सर्जन प्रदूषण के कई स्रोतों में शामिल है। ऐसे में सरकार पुराने और अधिक प्रदूषण वाले वाहनों की जगह स्वच्छ तकनीक वाले वाहनों को बढ़ावा देना चाहती है।

यह नीति उसी लंबी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें परिवहन क्षेत्र को धीरे-धीरे कम उत्सर्जन वाली व्यवस्था की ओर ले जाने का प्रयास है।

ऑटो चालकों के सामने नई चुनौती

इस बदलाव का सबसे सीधा असर आने वाले वर्षों में नए ऑटो खरीदने वाले चालकों पर पड़ सकता है। इलेक्ट्रिक ऑटो की शुरुआती कीमत, बैटरी, चार्जिंग सुविधा और दैनिक संचालन लागत उनके फैसले को प्रभावित करेंगे।

दिल्ली-NCR में CNG ऑटो से इलेक्ट्रिक ऑटो की ओर बढ़ता बदलाव सिर्फ वाहनों का बदलाव नहीं होगा, बल्कि शहरों की परिवहन व्यवस्था की दिशा भी बदल सकता है। अब असली चुनौती यह होगी कि स्वच्छ परिवहन के साथ चालकों के लिए यह बदलाव कितना आसान और किफायती बनाया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button