JNU में छात्रों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल, मेस बिल ऑडिट से फेलोशिप तक कई मांगों पर आंदोलन

JNU में छात्रों का आंदोलन तेज होता दिख रहा है। 3 अक्टूबर से शुरू हुई अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल में छात्र प्रशासन से कार्रवाई के आदेश वापस लेने, कैंपस सुविधाएं सुधारने और फेलोशिप बढ़ाने समेत कई मांगें उठा रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि बातचीत के बजाय उन्हें आंदोलन खत्म करने का दबाव दिया जा रहा है।
3 अक्टूबर से भूख हड़ताल पर छात्र
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्रों और प्रशासन के बीच विवाद अब आंदोलन का रूप ले चुका है। JNUSU पदाधिकारियों, पूर्व पदाधिकारियों और अन्य छात्रों ने 3 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की है। इससे पहले छात्रों ने ‘अधिकार मार्च’ निकाला था और रात में गंगा ढाबे पर जुटकर आंदोलन की शुरुआत की।
JNUSU के मुताबिक, संगठन के कई पदाधिकारी और 14 अन्य छात्र इस भूख हड़ताल में शामिल हैं।
CPO मैनुअल और कार्रवाई के आदेश का विरोध
छात्रों की प्रमुख मांगों में CPO मैनुअल को वापस लेना, JNUSU पदाधिकारियों के रस्टिकेशन और आउट-ऑफ-बाउंड्स आदेश को रद्द करना शामिल है। इसके अलावा कैंपस के खराब इंफ्रास्ट्रक्चर को दुरुस्त करने और GSCASH को फिर से बहाल करने की मांग भी उठाई गई है।
छात्र संगठन कथित रिक्रूटमेंट मामले की IQAC के जरिए स्वतंत्र जांच और रोहित एक्ट के अनुरूप EOC में सुधार की मांग भी कर रहा है।

प्रशासन पर दबाव बनाने का आरोप
JNUSU का आरोप है कि भूख हड़ताल के दौरान वाइस चांसलर ने चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर को यूनियन कार्यालय भेजा। छात्र संगठन के मुताबिक, CSO ने मौजूदा रस्टिकेशन और आउट-ऑफ-बाउंड्स आदेश का हवाला देते हुए आंदोलन को गैर-कानूनी बताया और चेतावनी दी कि प्रदर्शन जारी रहने पर रस्टिकेशन की अवधि बढ़ाई जा सकती है।
छात्र नेताओं ने इसे दबाव बनाने की कोशिश बताया है। उनका यह भी आरोप है कि भूख हड़ताल पर बैठे यूनियन पदाधिकारियों का मेडिकल चेकअप कराने से इनकार किया गया।
हॉस्टल से लाइब्रेरी तक सुविधाओं की मांग
छात्रों की मांगें केवल प्रशासनिक फैसलों तक सीमित नहीं हैं। बराक हॉस्टल में मेस और वाई-फाई बहाल करने, हॉस्टल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने और लाइब्रेरी में सीटें बढ़ाने की मांग की गई है।
इसके साथ 24 घंटे लिफ्ट सेवा और कावेरी, पेरियार व गोदावरी हॉस्टल की खराब लिफ्टों की मरम्मत भी मुद्दे में शामिल है। टेफ्लास और कैंपस की सड़कों की मरम्मत, स्टेडियम के रेनोवेशन, जेंडर-न्यूट्रल वॉशरूम और हेल्थ सेंटर में सुधार की मांग भी छात्रों ने रखी है।
मेस बिल और फेलोशिप का ऑडिट भी मुद्दा
JNUSU ने मेस बिलों के ऑडिट की मांग की है। संगठन चाहता है कि मेरिट-कम-मींस फेलोशिप की राशि बढ़ाई जाए और इंजीनियरिंग छात्रों को भी इसके दायरे में लाया जाए।
छात्र संगठन सालाना ऑडिट, सिद्धांत नॉलेज फाउंडेशन को हटाने और छात्र संघ के फंड को बहाल करने की मांग भी कर रहा है।
प्रवेश परीक्षा और GSCASH की बहाली
छात्रों ने JNUEE को दोबारा शुरू करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि प्रवेश व्यवस्था के साथ कैंपस में शिकायत निवारण और लैंगिक उत्पीड़न से जुड़े मामलों के लिए प्रभावी तंत्र जरूरी है। इसी वजह से GSCASH की बहाली आंदोलन की प्रमुख मांगों में शामिल है।
JNUSU का कहना है कि प्रशासनिक दबाव या कार्रवाई की चेतावनी से आंदोलन खत्म नहीं होगा। छात्र नेताओं के मुताबिक, जब तक मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकलता, भूख हड़ताल जारी रहेगी। अब पूरे मामले में प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत आगे बढ़ती है या टकराव और गहराता है, इस पर नजर रहेगी।
