उज्जैन के पुनीत बदेका का कमाल, 502 ग्राम का MIRA कैमरा पहुंचा अंतरिक्ष

जिस काम के लिए बड़े और भारी स्पेस कैमरों की जरूरत पड़ती थी, उसे अब महज 502 ग्राम का MIRA कैमरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उज्जैन के इंजीनियर पुनीत बदेका की टीम ने तैयार किया यह स्वदेशी सिस्टम SpaceX के Transporter-18 मिशन के जरिए अंतरिक्ष तक पहुंच चुका है।
मोबाइल से भी छोटा कैमरा पहुंचा अंतरिक्ष
उज्जैन के पुनीत बदेका ने स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक खास उपलब्धि हासिल की है। उनकी डीपटेक कंपनी EoN Space Labs का MIRA इमेजिंग सिस्टम SpaceX के Transporter-18 मिशन के साथ अंतरिक्ष तक पहुंचा है। MIRA को TakeMe2Space के MOI-1A ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट के साथ इंटीग्रेट किया गया है।
MIRA का वजन करीब 502 ग्राम है और इसका आकार सिर्फ 54×54×87 मिलीमीटर है। कंपनी के मुताबिक, यह बेहद कॉम्पैक्ट स्पेस-इमेजिंग सिस्टम है, जिसे छोटे सैटेलाइट और CubeSat जैसे प्लेटफॉर्म के लिए तैयार किया गया है।

9 मल्टीस्पेक्ट्रल बैंड से जुटाएगा खास डेटा
MIRA की सबसे खास बात केवल इसका छोटा आकार नहीं है। इसमें 9 मल्टीस्पेक्ट्रल बैंड हैं, यानी यह जमीन की तस्वीरों के साथ अलग-अलग स्पेक्ट्रल रेंज में वैज्ञानिक जानकारी जुटा सकता है।
कंपनी के स्पेसिफिकेशन के मुताबिक MIRA 400 से 850 नैनोमीटर के स्पेक्ट्रल रेंज में काम करता है। 500 किलोमीटर की ऊंचाई पर इसका PAN ग्राउंड सैंपलिंग डिस्टेंस करीब 9.167 मीटर है।
इस तरह की मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग तकनीक सिर्फ यह देखने के लिए नहीं होती कि जमीन पर क्या दिखाई दे रहा है, बल्कि अलग-अलग सतहों और वनस्पतियों की स्पेक्ट्रल प्रतिक्रिया से उपयोगी डेटा निकालने में मदद कर सकती है।
खेती से लेकर आपदा निगरानी तक इस्तेमाल
MIRA जैसे अर्थ-ऑब्जर्वेशन कैमरों का इस्तेमाल कृषि, पर्यावरण निगरानी, खनन और समुद्री गतिविधियों की निगरानी जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। EoN Space Labs भी कृषि, माइनिंग, मरीन मॉनिटरिंग, सप्लाई चेन और इंश्योरेंस को संभावित उपयोग क्षेत्रों में गिनाती है।
कृषि में इससे फसलों की स्थिति और जमीन से जुड़े संकेतकों का आकलन करने में मदद मिल सकती है। वहीं प्राकृतिक आपदाओं, संसाधनों की मैपिंग और बड़े इलाकों की निगरानी में भी इस तरह के डेटा की उपयोगिता हो सकती है।
पहले PSLV-C62 मिशन पर हुई थी कोशिश
MIRA की अंतरिक्ष यात्रा पहली कोशिश में पूरी नहीं हो सकी थी। जनवरी 2026 में इसे ISRO के PSLV-C62 मिशन पर MOI-1 के साथ भेजा गया था। मिशन के दौरान रॉकेट में आई तकनीकी समस्या के कारण पेलोड का सफल डिप्लॉयमेंट नहीं हो सका।
हालांकि EoN के मुताबिक उस मिशन से हार्डवेयर, स्पेसफ्लाइट पैकेजिंग और मैकेनिकल इंटीग्रेशन से जुड़े महत्वपूर्ण अनुभव मिले। इसके बाद टीम ने सिस्टम में सुधार किए और MIRA को फिर अंतरिक्ष मिशन के लिए तैयार किया।
पुनीत बदेका ने 2022 में शुरू की कंपनी
पुनीत बदेका EoN Space Labs के को-फाउंडर हैं। कंपनी की शुरुआत 2022 में हुई थी और यह छोटे आकार के इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल तथा इंफ्रारेड इमेजिंग सिस्टम विकसित करती है। IIT Madras Research Park के अनुसार बदेका ने SGSITS इंदौर से Industrial Engineering and Management में मास्टर्स किया और कंपनी में प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग तथा प्रोटोटाइपिंग से जुड़े काम की जिम्मेदारी संभाली।
पढ़ाई और शुरुआती इंजीनियरिंग अनुभवों के बाद उन्होंने भारत में एडवांस ऑप्टिकल टेक्नोलॉजी विकसित करने पर ध्यान दिया। MIRA इसी सोच का नतीजा है—कम वजन, छोटा आकार और अंतरिक्ष में इस्तेमाल के लिए जरूरी ऑप्टिकल क्षमता।
MIRA को मिला भारतीय पेटेंट
EoN Space Labs को MIRA की तकनीक के लिए भारतीय पेटेंट भी मिल चुका है। पेटेंट का शीर्षक “A Miniaturized Telescope-Based Imaging System” है। कंपनी के अनुसार यह तकनीक छोटे आकार में स्पेस-इमेजिंग क्षमता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित की गई है।
अब कंपनी का फोकस इस तकनीक को और बेहतर बनाने पर है। मौजूदा MIRA का वजन लगभग 502 ग्राम है और ग्राउंड रिजोल्यूशन करीब 9.2 मीटर है। आगे इसे और हल्का करने तथा बेहतर रिजोल्यूशन हासिल करने की दिशा में काम जारी है।
छोटी तकनीक, बड़ा अंतरिक्ष लक्ष्य
MIRA की कहानी सिर्फ एक छोटे कैमरे के अंतरिक्ष पहुंचने की कहानी नहीं है। यह दिखाती है कि भारत में स्पेस-टेक स्टार्टअप अब सैटेलाइट के पूरे सिस्टम के बजाय बेहद विशिष्ट और जटिल सब-सिस्टम भी विकसित कर रहे हैं।
EoN Space Labs के लिए अगला बड़ा लक्ष्य MIRA से वास्तविक अंतरिक्ष डेटा और इमेजरी हासिल करना है। अगर यह सिस्टम अपेक्षित प्रदर्शन करता है, तो छोटे सैटेलाइटों में कम वजन और कम जगह में उन्नत अर्थ-ऑब्जर्वेशन क्षमता जोड़ने की संभावनाएं और बढ़ सकती हैं।
