
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनावी तस्वीर लगभग साफ हो गई है। बीजेपी के आठ उम्मीदवारों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया। सपा की ओर से तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने के संकेत के बाद सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की संभावना बढ़ गई है।
बीजेपी के आठ उम्मीदवारों ने दाखिल किया नामांकन
बीजेपी के सभी आठ उम्मीदवारों ने निर्वाचन अधिकारी अजीत वर्मा के समक्ष नामांकन पत्र दाखिल किए। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पार्टी के वरिष्ठ नेता और सहयोगी दलों के प्रमुख नेता मौजूद रहे।
बीजेपी ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडे, प्रियंका रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी के मुताबिक, उम्मीदवारों के चयन में अलग-अलग सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है।
किस वर्ग से कौन उम्मीदवार?
बीजेपी के उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल और श्रुति गंगवार को ओबीसी वर्ग से, विद्यासागर सोनकर और प्रियंका रावत को अनुसूचित जाति से, राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडे को ब्राह्मण तथा राम प्रताप सिंह चौहान को क्षत्रिय वर्ग से जोड़ा जा रहा है।
आठ उम्मीदवारों में दो महिलाओं को भी जगह मिली है। इससे संकेत मिलता है कि बीजेपी ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर उम्मीदवारों का चयन किया है।
निर्वाचन अधिकारी अजीत वर्मा ने बताया कि सभी उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र के दो-दो सेट जमा किए हैं। प्रत्येक सेट के साथ 10 विधायकों के प्रस्तावक के तौर पर हस्ताक्षर हैं।
सपा के तीसरे उम्मीदवार की अटकलों पर विराम
राज्यसभा चुनाव में सपा की ओर से तीसरा उम्मीदवार उतारे जाने की अटकलें थीं। ऐसा होने पर बीजेपी के आठवें उम्मीदवार के सामने मुकाबला बन सकता था। हालांकि, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पार्टी की प्राथमिकता स्पष्ट कर दी।
अखिलेश यादव ने लिखा, “अब हमारा ध्यान तीन पर नहीं, बल्कि 403 पर है।” उनके इस बयान को राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए मुकाबले से पीछे हटने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
सपा के राम गोपाल यादव और रिलायंस इंडस्ट्रीज के अधिकारी धनराज परिमल नाथवानी पहले ही नामांकन दाखिल कर चुके हैं।
ब्रजेश पाठक ने सपा पर साधा निशाना
अखिलेश यादव के बयान पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “बात साफ है। सपा ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में हार मान ली है।”
यह ब्रजेश पाठक का राजनीतिक बयान है। सपा की ओर से 2027 के चुनाव को लेकर लगातार बीजेपी और एनडीए को चुनौती देने की बात कही जाती रही है। ऐसे में दोनों दलों के बीच विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के संकेत हैं।

प्रकाश पाल ने PDA को लेकर साधा निशाना
नामांकन के बाद बीजेपी उम्मीदवार प्रकाश पाल ने पार्टी के उम्मीदवार चयन को PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग से जोड़ते हुए सपा पर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी ही वास्तविक रूप से PDA का सम्मान करती है और सपा का PDA विमर्श “फर्जी” है।
यह बयान आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और सपा के बीच सामाजिक समीकरणों को लेकर चल रही राजनीतिक बहस का हिस्सा है। दोनों दल अपने-अपने सामाजिक गठजोड़ को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
हरदीप पुरी का टिकट कटा, धर्मपाल सिंह को मौका
बीजेपी की उम्मीदवार सूची सामने आने के बाद एक अहम बदलाव यह रहा कि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को यूपी से दोबारा राज्यसभा भेजने का मौका नहीं मिला। उनकी जगह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री धर्मपाल सिंह को उम्मीदवार बनाया गया।
इसके अलावा बीजेपी ने अपने मौजूदा राज्यसभा सदस्यों में से किसी को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। पार्टी के इस फैसले को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नए चेहरों और सामाजिक समीकरणों को प्राथमिकता देने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
अब निर्विरोध चुनाव की बढ़ी संभावना
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए दो उम्मीदवार पहले ही सपा की ओर से नामांकन कर चुके हैं और बीजेपी ने आठ उम्मीदवार उतारे हैं। अगर नाम वापसी तक कोई नया उम्मीदवार मैदान में नहीं आता है, तो कुल 10 उम्मीदवारों के सामने 10 सीटें होंगी।
ऐसी स्थिति में मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी और सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो सकते हैं। फिलहाल सपा के तीसरे उम्मीदवार को लेकर अखिलेश यादव का बयान इस चुनाव में मुकाबले की संभावनाओं को काफी हद तक खत्म करता दिखाई दे रहा है। अब यूपी की राजनीति का अगला बड़ा फोकस 2027 विधानसभा चुनाव पर रहेगा।
