CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ NSUI का प्रदर्शन, इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI ने सोमवार को प्रदर्शन किया। NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के नेतृत्व में संगठन के कार्यकर्ता नई दिल्ली स्थित NSUI मुख्यालय, 5 रायसीना रोड पर जुटे। संगठन ने CEC के तत्काल इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग की।
NSUI का कहना है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े सवालों का जवाब मिलना चाहिए। संगठन इस विरोध को “वोट चोरी” के मुद्दे से जोड़ रहा है।
2 अक्टूबर से लगातार प्रदर्शन
CEC के खिलाफ दिल्ली में विरोध प्रदर्शन 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से शुरू हुए थे। इसके बाद अलग-अलग विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है।
रविवार को भी जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने कई जगह रोका। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं थी और निषेधाज्ञा लागू थी। पुलिस ने बताया कि करीब 120 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि अन्य रिपोर्टों में संख्या इससे अधिक बताई गई है।

बसों में ले जाने पर भी विवाद
प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर ले जाने को लेकर विवाद बढ़ गया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की और बदसलूकी हुई।
वहीं पुलिस का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया और हिरासत में लिए गए लोगों को बाद में छोड़ दिया गया। कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
महिला पत्रकारों के आरोपों से भी बढ़ा विवाद
इस पूरे घटनाक्रम के बीच तीन महिला पत्रकारों ने 3 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए। दिल्ली पुलिस ने इन शिकायतों को क्राइम ब्रांच को जांच के लिए भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक CCTV फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
इस मामले ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की भूमिका को लेकर अलग से बहस खड़ी कर दी है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की जांच अभी जारी है।
चुनावी प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल
प्रदर्शनकारी SIR यानी Special Intensive Revision और मतदाता सूची में कथित बदलावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। दूसरी तरफ निर्वाचन आयोग इन आरोपों को खारिज करता रहा है और SIR को मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया बताता है।
आगे और तेज हो सकता है आंदोलन
दिल्ली में लगातार तीसरे दिन भी विरोध, हिरासत और पुलिस के साथ टकराव की घटनाएं सामने आईं। करीब 5,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बीच प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश करते रहे।
NSUI के प्रदर्शन के बाद साफ है कि CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों का विरोध फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा। अब असली सवाल यह है कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे आरोपों का समाधान राजनीतिक प्रदर्शन से होगा या संस्थागत जांच और जवाबदेही की प्रक्रिया से।
