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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद SIR पर इमरान मसूद ने उठाए बड़े सवाल

बिहार से शुरू हुई वोटर लिस्ट की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर लगने के बाद अब देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। अदालत ने निर्वाचन आयोग के फैसले को सही ठहराते हुए प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी है। इसके बाद कांग्रेस सांसद Imran Masood ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए किया जा रहा है और इससे चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। इमरान मसूद ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब SIR हो रहा है लेकिन इस बार जिस तरह से इसका इस्तेमाल किया जा रहा है वह चिंता पैदा करता है। उन्होंने दावा किया कि लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाकर उनकी अपील को लंबित रखा जाता है और जब तक सुनवाई होती है तब तक चुनाव संपन्न हो जाते हैं। ऐसे में लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

वोट कटने और अपील प्रक्रिया पर कांग्रेस का बड़ा सवाल

कांग्रेस सांसद ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाए और बाद में उसकी अपील सही साबित हो जाए तो तब तक चुनाव हो चुका होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में चुनाव को कितना निष्पक्ष माना जाएगा। इमरान मसूद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अंतिम सूची भी जारी हो गई है तो अब दोबारा वोट काटने का आधार क्या होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले से तैयार किए गए कुछ फॉर्मों के जरिए लोगों के वोट हटाए जा सकते हैं और बाद में उन्हें अपील करने के लिए कहा जाता है। कांग्रेस सांसद ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा कि अगर किसी का वोट बिना पर्याप्त जांच के काटा जाता है तो यह सिर्फ एक व्यक्ति का अधिकार छिनना नहीं बल्कि पूरे लोकतंत्र को कमजोर करना है। इसी वजह से विपक्ष लगातार इस मुद्दे को जनता के बीच उठा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद SIR पर इमरान मसूद ने उठाए बड़े सवाल

निष्पक्ष चुनाव के लिए हलफनामे की मांग

इमरान मसूद ने कहा कि अगर चुनाव आयोग वास्तव में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव चाहता है तो SIR प्रक्रिया में सख्त नियम लागू किए जाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि जो भी व्यक्ति किसी दूसरे मतदाता के खिलाफ फॉर्म जमा करे उसे हलफनामे के साथ आवेदन देना चाहिए। अगर बाद में वह जानकारी गलत पाई जाए तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। सांसद ने कहा कि देश में इस समय वोटर लिस्ट को लेकर भ्रम और अविश्वास का माहौल बनता जा रहा है और इसे खत्म करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का वोट है और अगर वही संदेह के घेरे में आ जाए तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर पड़ जाती है। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग की प्रक्रिया का विरोध नहीं कर रहा बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहता है कि किसी भी नागरिक का अधिकार बिना उचित कारण छीना न जाए।

घुसपैठ और वोटर लिस्ट पर सरकार से सीधा सवाल

इमरान मसूद ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसी भी विदेशी या घुसपैठिए का नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कोई अवैध रूप से देश में रह रहा है तो उसका नाम मतदाता सूची में नहीं होना चाहिए। लेकिन उन्होंने सरकार से सवाल पूछा कि अगर इतने वर्षों से घुसपैठियों की बात की जा रही है तो अब तक उन्हें क्यों नहीं चिन्हित किया जा सका। उन्होंने कहा कि बारह साल तक सत्ता में रहने के बाद भी अगर सरकार घुसपैठियों की पहचान नहीं कर पाई तो यह प्रशासनिक विफलता मानी जाएगी। कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि चुनावी माहौल में इस मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद SIR प्रक्रिया को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर चुनावी मंचों तक बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है।

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