
वीआईपी (विकासशील इंसान पार्टी) के संस्थापक और पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन पर उनके राजनीतिक कार्यक्रमों में अनावश्यक हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है। महाराजगंज में प्रस्तावित रात्रि प्रवास कार्यक्रम से पहले पुलिस अधिकारियों द्वारा अनुमति और कार्यक्रम की जानकारी मांगे जाने पर उनकी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से फोन पर तीखी बहस हो गई। इस बातचीत का जिक्र सामने आने के बाद मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
‘यह सार्वजनिक सभा नहीं, अनुमति की जरूरत नहीं’
मुकेश सहनी ने फोन पर संबंधित अधिकारी से कहा कि वह पिछले कई दिनों से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं। उनके अनुसार, रात्रि प्रवास के दौरान होटल में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात तथा सामान्य चर्चा होती है। यह कोई सार्वजनिक सभा या बड़ी भीड़ जुटाने वाला कार्यक्रम नहीं है, इसलिए ऐसी स्थिति में प्रशासन से अनुमति लेने का सवाल ही नहीं उठता।
उन्होंने अधिकारी से कहा कि उनका कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित है।
‘संविधान हम भी जानते हैं, चूड़ी नहीं पहना है’
फोन पर बातचीत के दौरान मुकेश सहनी ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, “हम सरकार रह चुके हैं। नियम हम भी जानते हैं। संविधान जानते हैं। चूड़ी नहीं पहना है।”

उन्होंने यह भी कहा कि उनके दौरे की जानकारी और प्रोटोकॉल पहले ही प्रशासन को भेजा जा चुका था। सहनी ने जोर देकर कहा कि भारत के किसी भी राज्य या जिले में जाना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसे रोका नहीं जा सकता।
योगी सरकार पर लगाए हस्तक्षेप के आरोप
मुकेश सहनी ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार के इशारे पर पुलिस उनके कार्यक्रमों में व्यवधान उत्पन्न करने की कोशिश कर रही है। उनका कहना था कि प्रशासन को किसी राजनीतिक दल के एजेंडे पर नहीं, बल्कि संविधान और कानून के अनुसार कार्य करना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनके शांतिपूर्ण कार्यक्रम में किसी भी प्रकार की बाधा डाली गई, तो वह कानूनी रास्ता अपनाएंगे और जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
‘सरकारें बदलती रहती हैं, अधिकारी निष्पक्ष रहें’
बातचीत के अंत में मुकेश सहनी ने प्रशासनिक अधिकारियों से निष्पक्षता बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती और समय के साथ सरकारें बदलती रहती हैं। इसलिए अधिकारियों को किसी राजनीतिक दबाव में आने के बजाय संविधान और कानून की भावना के अनुरूप कार्य करना चाहिए।
फिलहाल इस मामले पर उत्तर प्रदेश पुलिस या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
