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22 साल पुराने इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में बड़ा फैसला, तीन दोषियों को उम्रकैद

नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पिता और लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस चर्चित मामले में दोषी पाए गए विक्रम यादव, पन्ना सिंह और बृजेश यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही तीनों दोषियों पर कुल डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। फैसला सुनाए जाने के दौरान अदालत में इंद्रदेव सिंह की पत्नी नयनतारा सिंह, बेटी लक्ष्मी सिंह और परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

दिनदहाड़े गोली मारकर की गई थी हत्या

8 अगस्त 2002 को शाम करीब चार बजे लखनऊ के कैसरबाग टेलीफोन एक्सचेंज के पास वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद उनकी पत्नी नयनतारा सिंह ने पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच बाद में CBI को सौंप दी गई। जांच के दौरान कई नए नाम सामने आए और वर्ष 2004 में एजेंसी ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की।

22 साल पुराने इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में बड़ा फैसला, तीन दोषियों को उम्रकैद

जमीन विवाद बना हत्या की वजह

CBI जांच में सामने आया कि हत्या की साजिश पांच बीघा जमीन के विवाद को लेकर रची गई थी। जांच एजेंसी के अनुसार एक बर्खास्त लेखपाल ने पूरी साजिश तैयार की थी। अदालत ने बृजेश यादव, पन्ना सिंह और विक्रम यादव को हत्या की साजिश और वारदात में शामिल होने का दोषी माना। अभियोजन के मुताबिक घटना के दौरान बृजेश यादव स्कूटर चला रहा था, जबकि विक्रम यादव ने इंद्रदेव सिंह पर गोलियां चलाई थीं।

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिला फैसला

इस मामले में कुल छह आरोपी थे, लेकिन मुकदमे की सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मौत हो गई। करीब 22 वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब CBI की विशेष अदालत ने तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए मामले का महत्वपूर्ण फैसला दिया है। यह निर्णय लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

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