
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में कोल माइन परियोजना के लिए किए जा रहे कथित भूमि अधिग्रहण को लेकर कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने इस पूरे मामले को ‘अंगूठा चोरी’ का नाम देते हुए दावा किया है कि तीन गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान फर्जी ग्राम सभाएं आयोजित की गईं। कांग्रेस का आरोप है कि दस्तावेजों में मृत लोगों के नाम पर अंगूठे के निशान और हस्ताक्षर दर्ज कर आदिवासी समुदाय की सहमति दर्शाने की कोशिश की गई। पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मृत और जीवित लोगों के नाम पर फर्जी दस्तावेजों का आरोप
कांग्रेस अनुसूचित जनजाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि धिरौली क्षेत्र की ग्राम सभाओं के रिकॉर्ड में ऐसे लोगों के नाम दर्ज हैं, जिनकी कई वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी थी। उन्होंने दावा किया कि ब्रजभान सिंह का निधन वर्ष 2014 में हो गया था, लेकिन वर्ष 2021 के दस्तावेजों में उनके नाम पर अंगूठे का निशान दर्ज मिला। कांग्रेस का यह भी आरोप है कि समरा सिंह और सोमती सिंह जैसे जीवित और शिक्षित लोगों के नाम पर भी कथित रूप से फर्जी अंगूठे लगाए गए।

वनाधिकार कानून और पेसा अधिनियम के उल्लंघन का दावा
कांग्रेस का कहना है कि अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण के लिए ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य होती है, लेकिन इस मामले में वनाधिकार अधिनियम और पेसा कानून के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। पार्टी का दावा है कि अब तक ऐसे छह मामलों की पहचान हो चुकी है, जो कथित रूप से बड़े स्तर पर दस्तावेजों में गड़बड़ी की ओर संकेत करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट जाने और आंदोलन की घोषणा
कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह इस पूरे मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। पार्टी का कहना है कि न्यायालय में याचिका दाखिल करने के साथ-साथ मध्य प्रदेश में व्यापक जनआंदोलन भी चलाया जाएगा। कांग्रेस ने कहा कि आदिवासियों की जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर अदालत तक हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा। फिलहाल इन आरोपों पर संबंधित सरकारी पक्ष की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
