राज्यराजनीति

नेपाल में सैलाब से तबाही, 270 मौतें और 1000 से ज्यादा लापता; 288 भारतीयों की तलाश तेज

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सैकड़ों लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के बीच भारतीय नागरिकों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। भारत सरकार ने राहत अभियान तेज करने के साथ प्रभावित लोगों के लिए विशेष हेल्पलाइन भी जारी की है।

नेपाल में सैलाब ने मचाई भारी तबाही

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड से अब तक 270 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि 1000 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक चितवन में सबसे ज्यादा 108 शव बरामद हुए हैं। इसके अलावा नवलपरासी पूर्व में 62, धादिंग में 27, गोरखा में 20 और रसुवा में 17 शव मिले हैं।

288 भारतीय नागरिक भी लापता

इस त्रासदी ने भारत की चिंता भी बढ़ा दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार नेपाल में 288 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें तमिलनाडु के दो अलग-अलग समूहों में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए लोग भी शामिल हैं। पश्चिम बंगाल, केरल और देश के अन्य राज्यों के नागरिकों के भी लापता होने की सूचना है।

नेपाल में सैलाब से तबाही, 270 मौतें और 1000 से ज्यादा लापता; 288 भारतीयों की तलाश तेज

चीन की तरफ फंसे 200 भारतीय

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार करीब 200 भारतीय नागरिक चीन के तिब्बत क्षेत्र में फंसे हुए हैं। इनमें से कुछ लोग नेपाल के रास्ते भारत लौटने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्रालय ने बताया कि 21 तमिलनाडु के नागरिकों को बचाया जा चुका है। हालांकि हालात तेजी से बदल रहे हैं और प्रशासन लगातार संपर्क में है।

भारत ने भेजी राहत सामग्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से बातचीत कर मुश्किल घड़ी में हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है। भारत ने राहत और बचाव अभियान के लिए नेपाल को 47.5 टन आपातकालीन सामग्री भेजी है। दो विमानों के जरिए आठ टन दवाएं और एक टन खाद्य सामग्री भी काठमांडू पहुंचाई गई है।

कैसे आई इतनी विनाशकारी बाढ़?

बताया गया है कि तिब्बत में ग्लेशियर फटने के बाद पानी और मलबे का भारी प्रवाह नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में पहुंचा। देखते ही देखते पानी ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। करीब 19 पुल, 40 किलोमीटर हाईवे और नौ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तबाह होने की जानकारी सामने आई है।

तेज बहाव की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रसुवा से बहकर आए शव करीब 150 किलोमीटर दूर चितवन में मिले हैं।

भारतीय नागरिकों के लिए कंट्रोल रूम

स्थिति को देखते हुए विदेश मंत्रालय ने 24×7 विशेष कंट्रोल रूम बनाया है। नेपाल में फंसे भारतीय नागरिक या उनके परिजन मंत्रालय से संपर्क कर सकते हैं। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने भी आपातकालीन संपर्क नंबर जारी किए हैं। सरकार का फोकस फिलहाल लापता लोगों की जानकारी जुटाने, फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालने और नेपाल के राहत अभियान में सहयोग करने पर है।

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