
पंजाब में 150 से ज्यादा कर्मचारी संगठनों की राज्यव्यापी महा हड़ताल से सरकारी कामकाज और अस्पतालों की ओपीडी प्रभावित हुई। कर्मचारियों की मांगों के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कहा कि सरकार बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन हड़ताल और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकती।
महा हड़ताल से सरकारी कामकाज प्रभावित
पंजाब में गुरुवार को सरकारी कर्मचारियों की महा हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। राज्य के अलग-अलग सरकारी विभागों में कामकाज प्रभावित रहा, वहीं सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं भी बाधित होने की खबर है।
कर्मचारी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए एकजुट हुए हैं। पंजाब सांझा मुलाजिम मंच के बैनर तले 150 से अधिक कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल में हिस्सा लिया।
डीए समेत कई मांगों पर जोर
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में लंबित 18 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) जारी करना शामिल है। इसके अलावा पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने और संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी उठाई गई है।
कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की ओर से कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन उनकी मांगों का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है। इसी नाराजगी के चलते राज्यव्यापी हड़ताल का फैसला लिया गया।

जालंधर में होनी थी अहम बैठक
मुख्यमंत्री भगवंत मान को गुरुवार को जालंधर में कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करनी थी। इसमें कर्मचारियों की समस्याओं और लंबित मांगों पर चर्चा प्रस्तावित थी।
हालांकि, हड़ताल के बीच मुख्यमंत्री ने बातचीत को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट कर दिया। इससे कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच आगे की बातचीत का रास्ता फिलहाल हड़ताल खत्म करने की शर्त से जुड़ गया है।
CM मान ने कहा- बातचीत और हड़ताल साथ नहीं
भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि कर्मचारी सरकार के परिवार का अहम हिस्सा हैं और उनकी हर जायज मांग सुनने के लिए सरकार तैयार है।
लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “बातचीत और हड़ताल एक साथ नहीं चल सकतीं।” मुख्यमंत्री के मुताबिक, सरकार समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन बातचीत तभी होगी जब कर्मचारी हड़ताल समाप्त करेंगे।
अस्पतालों की ओपीडी पर भी असर
महा हड़ताल का सबसे संवेदनशील असर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा। कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, कई सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं बंद रहीं।
इसका सीधा असर उन मरीजों पर पड़ा, जो इलाज और परामर्श के लिए सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में कर्मचारियों की मांगों और आम लोगों की स्वास्थ्य जरूरतों के बीच संतुलन सरकार के सामने बड़ी चुनौती बन गया है।
अब आगे क्या होगा?
सरकार का रुख स्पष्ट है कि पहले हड़ताल खत्म हो और उसके बाद कर्मचारी संगठनों के साथ बातचीत आगे बढ़े। वहीं कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर दबाव बनाए हुए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और कर्मचारी संगठन टकराव से बाहर निकलकर बातचीत की मेज तक पहुंच पाएंगे? क्योंकि हड़ताल जितनी लंबी होगी, उसका असर सिर्फ सरकारी कर्मचारियों पर नहीं, बल्कि आम जनता की रोजमर्रा की सेवाओं पर भी बढ़ता जाएगा।
