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22,500 करोड़ के न्यूक्लियर निवेश पर तेजस्वी का हमला, बोले- ‘फर्जी सम्राट सरकार’ का दावा कितना सच?

बिहार में करीब 51,500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर हुए MoU के बाद सियासत तेज हो गई है। तेजस्वी यादव ने सबसे बड़े 22,500 करोड़ रुपये के परमाणु क्षेत्र वाले प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कंपनी की पूंजी और पुराने निवेश समझौतों की प्रगति पर सरकार से जवाब मांगा है।

51,500 करोड़ के निवेश पर सरकार का दावा

बिहार सरकार ने औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कंपनियों और औद्योगिक समूहों के साथ करीब 51,500-51,600 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों से जुड़े समझौते किए हैं। इनमें परमाणु ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा लगभग 22,500 करोड़ रुपये का प्रस्ताव सबसे बड़ा बताया जा रहा है।

सरकार इसे बिहार में औद्योगिक विस्तार और निवेश आकर्षित करने की दिशा में अहम कदम के तौर पर पेश कर रही है।

तेजस्वी यादव ने उठाया सबसे बड़े प्रस्ताव पर सवाल

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस कंपनी के पास कथित तौर पर महज 11 लाख रुपये की पूंजी है, वह 22,500 करोड़ रुपये का निवेश कैसे करेगी।

तेजस्वी ने इसी आधार पर सम्राट सरकार को ‘फर्जी’ करार देते हुए निवेश प्रस्ताव की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए।

कंपनी की स्थापना को लेकर भी दावा

तेजस्वी यादव का दावा है कि जिस कंपनी के नाम से यह बड़ा निवेश प्रस्ताव जुड़ा है, उसकी स्थापना 25 फरवरी 2026 को हुई और उसकी कुल पूंजी करीब 11 लाख रुपये है।

22,500 करोड़ के न्यूक्लियर निवेश पर तेजस्वी का हमला, बोले- ‘फर्जी सम्राट सरकार’ का दावा कितना सच?

उन्होंने सरकार से पूछा कि इतनी कम पूंजी वाली कंपनी अचानक हजारों करोड़ रुपये का निवेश करने की क्षमता कहां से लेकर आई। हालांकि, यह तेजस्वी यादव द्वारा किया गया राजनीतिक दावा है और कंपनी की वित्तीय क्षमता, निवेश स्रोत तथा प्रस्ताव की वास्तविक संरचना को लेकर सरकार या संबंधित कंपनी का आधिकारिक पक्ष इस जानकारी में सामने नहीं है।

पुराने MoU की प्रगति रिपोर्ट पर भी सवाल

तेजस्वी ने केवल नए निवेश प्रस्ताव पर सवाल नहीं उठाया। उन्होंने सरकार से 2024, 2025 और उससे पहले किए गए दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौतों की प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।

उनका सवाल है कि पहले किए गए MoU में से कितने जमीन पर उतरे, कितने उद्योग शुरू हुए और कितनी वास्तविक पूंजी बिहार में आई।

‘बड़ी कंपनियों का स्वागत, कागजी कंपनियों का विरोध’

आरजेडी नेता ने कहा कि बिहार में बड़ी कंपनियां उद्योग स्थापित करें और अपनी पूंजी से निवेश करें तो विपक्ष उनका स्वागत करेगा और सहयोग भी करेगा। लेकिन उनका आरोप है कि यदि केवल कागजी कंपनियां बनाकर जमीन, संपत्ति या सरकारी अनुदान का लाभ लेने की कोशिश की गई तो इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

यह बयान बिहार में निवेश के साथ-साथ MoU बनाम वास्तविक निवेश की बहस को भी सामने लाता है।

अब सरकार के जवाब पर नजर

22,500 करोड़ रुपये के परमाणु क्षेत्र वाले प्रस्ताव ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक तरफ सरकार इसे बड़े औद्योगिक निवेश की शुरुआत बता रही है, तो दूसरी ओर तेजस्वी यादव कंपनी की क्षमता और पुराने MoU की प्रगति पर सवाल उठा रहे हैं।

अब सबसे अहम सवाल यही है कि सरकार संबंधित कंपनी की वित्तीय क्षमता, निवेश की योजना और पुराने समझौतों की वास्तविक प्रगति के आंकड़े कितनी स्पष्टता से सामने रखती है। बिहार के लिए असली सफलता MoU की संख्या नहीं, बल्कि जमीन पर उतरने वाले निवेश और बनने वाले रोजगार होंगे।

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