यूपी राज्यसभा चुनाव में सपा का बड़ा बदलाव, आलोक रंजन की जगह धनराज नथवानी क्यों?

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने आखिरी समय पर अपना दूसरा उम्मीदवार बदलकर राजनीतिक हलकों को चौंका दिया। आलोक रंजन का नाम चर्चा में था, लेकिन अंततः धनराज परिमल नथवानी ने रामगोपाल यादव के साथ नामांकन दाखिल किया।
आलोक रंजन का नाम था लगभग तय
राज्यसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सपा में रामगोपाल यादव के साथ पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन का नाम प्रमुखता से चल रहा था। पार्टी के भीतर उनके नाम को लेकर तैयारियां भी शुरू हो गई थीं। पिछले राज्यसभा चुनाव में भी सपा ने आलोक रंजन को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वह चुनाव जीत नहीं सके थे। इस बार फिर उनका नाम सामने आने से माना जा रहा था कि पार्टी उन्हें दोबारा मौका दे सकती है।
29 सितंबर को बदलने लगा पूरा घटनाक्रम
29 सितंबर को सपा कार्यालय में विधायकों की बैठक के दौरान उम्मीदवारों को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी बीच आलोक रंजन के नाम को लेकर स्थिति बदलने लगी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नामांकन फॉर्म पर प्रस्तावकों के हस्ताक्षर की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, लेकिन कुछ फॉर्म में उम्मीदवार का नाम खाली रखा गया था। इसी दौरान सपा के भीतर नए नाम को लेकर मंथन तेज हुआ।

‘समुद्र किनारे से आएगा’ वाली चर्चा
पार्टी के भीतर दूसरे उम्मीदवार के नाम को लेकर उत्सुकता बढ़ी तो कथित तौर पर अखिलेश यादव की ओर से ऐसा संकेत दिया गया कि नाम सामने आने पर लोग चौंकेंगे। इसके बाद किसी उद्योग जगत से जुड़े व्यक्ति के उम्मीदवार बनने की चर्चा शुरू हुई। देर रात तक बैठकों का दौर चला और आखिरकार धनराज परिमल नथवानी के नाम पर सहमति बनी।
सुबह सामने आया नथवानी का नाम
30 सितंबर की सुबह समाजवादी पार्टी ने रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को यूपी से राज्यसभा उम्मीदवार घोषित कर दिया। दोनों ने अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया। यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर को होना है और नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है।
कौन हैं धनराज परिमल नथवानी?
धनराज नथवानी कॉरपोरेट और खेल प्रशासन से जुड़े रहे हैं। उनकी आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक वे रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े रहे हैं और गुजरात में खेल तथा सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय हैं। वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं।
उनके पिता परिमल नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और झारखंड से राज्यसभा सांसद हैं। धनराज का राजनीतिक आधार उत्तर प्रदेश के बजाय गुजरात और कॉरपोरेट क्षेत्र से जुड़ा रहा है, इसलिए सपा का उन्हें यूपी से उम्मीदवार बनाना चर्चा का विषय बना है।
फैसले के पीछे क्या है?
धनराज नथवानी को उम्मीदवार बनाने के पीछे सपा का आधिकारिक तौर पर विस्तृत कारण सामने नहीं आया है। इसलिए इसके पीछे किसी खास राजनीतिक डील या उद्देश्य को निश्चित तथ्य के रूप में कहना उचित नहीं होगा। इतना जरूर है कि आलोक रंजन के संभावित नाम से नथवानी तक हुआ यह बदलाव बेहद कम समय में हुआ और इसने राज्यसभा चुनाव की सियासत को नया मोड़ दे दिया है।
अब नजर इस बात पर है कि नथवानी की उम्मीदवारी सपा की आगे की राजनीतिक रणनीति में क्या भूमिका निभाती है। फिलहाल एक बात साफ है—नामांकन से ठीक पहले बदला गया यह नाम यूपी की राज्यसभा राजनीति में सबसे चर्चित घटनाक्रमों में शामिल हो गया है।
