पटियाला जेल में बलवंत सिंह राजोआणा से मिले जत्थेदार, बोले- ‘दया की भीख नहीं मांगेंगे’, 2 अक्टूबर के चेतना मार्च को समर्थन

पटियाला केंद्रीय जेल में बंद बलवंत सिंह राजोआणा से श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह और SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने मुलाकात की। मुलाकात के दौरान राजोआणा की सेहत और उनके मामले की मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई। राजोआणा की दया याचिका और सजा से जुड़ा मामला लंबे समय से केंद्र और न्यायपालिका के स्तर पर चर्चा में रहा है।
पटियाला जेल में हुई विशेष मुलाकात
धार्मिक नेताओं ने केंद्रीय जेल पटियाला पहुंचकर राजोआणा से विशेष मुलाकात की। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि राजोआणा ने किसी से दया की भीख मांगने से इनकार किया है।
उन्होंने सिख इतिहास और परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि उनके अनुसार सिखों ने कठिन परिस्थितियों में भी शहादत का रास्ता चुना है। यह बयान जत्थेदार की ओर से दिया गया है और इसे धार्मिक नेतृत्व के रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
राजोआणा की सजा का मामला क्या है?
बलवंत सिंह राजोआणा को 1995 में तत्कालीन पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। ट्रायल कोर्ट ने 2007 में उन्हें मौत की सजा सुनाई थी, जिसे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 2010 में बरकरार रखा। राजोआणा ने इस फैसले के खिलाफ खुद अपील दाखिल नहीं की थी।
राजोआणा की ओर से दया याचिका का मामला भी लंबे समय से लंबित रहा है। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, SGPC ने 25 मार्च 2012 को उनकी ओर से दया याचिका दाखिल की थी। हालांकि केंद्र सरकार ने उस समय यह रुख रखा था कि राजोआणा ने स्वयं दया याचिका दाखिल नहीं की थी।

2019 में केंद्र ने क्या फैसला लिया था?
गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश गुरुपर्व के अवसर पर 27 सितंबर 2019 को गृह मंत्रालय ने राज्यों को पत्र भेजा था। इसमें आठ सिख कैदियों को विशेष छूट देने और एक सिख कैदी की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने के प्रस्ताव का उल्लेख था। राजोआणा का मामला इसी प्रक्रिया के तहत अनुच्छेद 72 के अंतर्गत आगे बढ़ाया जाना था।
हालांकि, यह प्रक्रिया अंतिम रूप से राजोआणा की सजा को उम्रकैद में बदलने के रूप में पूरी नहीं हुई। 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को प्रस्ताव पर प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा था, जबकि 2023 में अदालत ने सजा को खुद उम्रकैद में बदलने से इनकार करते हुए मामले पर निर्णय केंद्र के अधिकार क्षेत्र में छोड़ा था।
32 साल से जेल में होने का दावा
SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने मुलाकात के बाद कहा कि राजोआणा लंबे समय से जेल में हैं और उन्होंने अपनी ओर से माफी नहीं मांगने का रुख दोहराया है। सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट में राजोआणा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपनी दया याचिका पर तत्काल निर्णय लेने की अपील भी की थी। उस समय उन्होंने कहा था कि वह 31 साल जेल में बिता चुके हैं और करीब 20 साल से फांसी की सजा का सामना कर रहे हैं।
इससे स्पष्ट है कि राजोआणा का मामला केवल धार्मिक संगठनों तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी विचार का विषय रहा है।
2 अक्टूबर के चेतना मार्च को समर्थन
हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि यदि सरकार की ओर से समय रहते उचित कदम नहीं उठाया गया तो पांच सिंह साहिबान की बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय की जा सकती है।
इसके साथ ही SGPC और श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से 2 अक्टूबर को बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर प्रस्तावित ‘चेतना मार्च’ को समर्थन देने की घोषणा की गई है। इस मार्च का उद्देश्य बंदी सिखों के मामलों और उनकी रिहाई से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक रूप से उठाना बताया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में मामला पहले भी पहुंच चुका है
राजोआणा की सजा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लंबी कानूनी प्रक्रिया चली है। 2023 में अदालत ने कहा था कि ऐसे संवेदनशील मामले में सजा में बदलाव का फैसला कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है। अदालत ने उस समय मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग स्वीकार नहीं की थी।
सितंबर 2026 में राजोआणा की ओर से प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आया है। अब धार्मिक नेतृत्व की ताजा मुलाकात और 2 अक्टूबर के चेतना मार्च के समर्थन से मामला फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में है।
बलवंत सिंह राजोआणा का मामला करीब तीन दशक से अधिक समय से कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। 2019 में केंद्र की ओर से उनकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की प्रक्रिया शुरू करने का उल्लेख हुआ था, लेकिन अंतिम निर्णय नहीं हो सका। अब अकाल तख्त और SGPC के प्रतिनिधियों की मुलाकात तथा चेतना मार्च के समर्थन के बाद इस मामले पर आगे की कार्रवाई को लेकर फिर ध्यान केंद्रित हुआ है।
