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KGMU में फिर धरने पर नर्सिंग स्टूडेंट्स, डीन के इस्तीफे की मांग; दिव्यांशी की मौत के बाद बढ़ा विवाद

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में नर्सिंग छात्रों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। बीएससी नर्सिंग छात्रा दिव्यांशी यादव की मौत के बाद शुरू हुआ विरोध कुलपति के आश्वासन पर कुछ समय के लिए थमा था, लेकिन छात्रों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब छात्र नर्सिंग डीन के खिलाफ कार्रवाई और लिखित इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं।

कुलपति के आश्वासन के बाद स्थगित हुआ था आंदोलन

दिव्यांशी यादव की मौत के बाद KGMU के नर्सिंग छात्रों ने लगातार प्रदर्शन किया था। करीब दो दिन चले आंदोलन के बाद कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने छात्रों से बातचीत की थी।

कुलपति की ओर से छात्रों की मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद छात्रों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था। रिपोर्टों के मुताबिक, उस समय छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बातचीत के बाद परिसर में स्थिति सामान्य हुई थी।

अब डीन के खिलाफ कार्रवाई की मांग

आंदोलन दोबारा शुरू होने के पीछे छात्रों का कहना है कि आश्वासन के बावजूद उनकी प्रमुख मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। छात्रों ने अब नर्सिंग डीन डॉ. अमिता पांडेय मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई और उनके इस्तीफे की मांग उठाई है।

छात्रों का कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं है। वे जिम्मेदार अधिकारियों के इस्तीफे को लिखित रूप में स्वीकार किए जाने की मांग कर रहे हैं। इससे पहले विरोध के दौरान नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल सूचना राय भौमिक ने अपने पद से इस्तीफा दिया था।

KGMU में फिर धरने पर नर्सिंग स्टूडेंट्स, डीन के इस्तीफे की मांग; दिव्यांशी की मौत के बाद बढ़ा विवाद

दिव्यांशी यादव की मौत से शुरू हुआ विवाद

पूरा मामला बीएससी नर्सिंग की द्वितीय वर्ष की छात्रा दिव्यांशी यादव की मौत के बाद शुरू हुआ। दिव्यांशी की उम्र 22 वर्ष बताई गई है और वह वाराणसी की रहने वाली थीं। 19 सितंबर को वाराणसी में इलाज के दौरान उनकी मौत हुई थी। उपलब्ध रिपोर्टों में उनकी मौत का कारण डेंगू बताया गया है।

प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि दिव्यांशी को 11 सितंबर को तेज बुखार आया था और 16 सितंबर को डेंगू की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बावजूद उन्हें समय पर छुट्टी नहीं दी गई। छात्रों के मुताबिक, 17 सितंबर को उनके माता-पिता उन्हें इलाज के लिए वाराणसी ले गए, जहां अगले दिन उनकी मौत हो गई।

हालांकि, ये छात्रों के आरोप हैं। KGMU प्रशासन की ओर से कहा गया है कि दिव्यांशी की जांच और इलाज कराया गया था तथा मामले की जांच की जा रही है। इसलिए इलाज में कथित लापरवाही के आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

बीमार छात्रों से ड्यूटी कराने का भी आरोप

विरोध के दौरान नर्सिंग छात्रों ने हॉस्टल और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए। छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल में कई विद्यार्थी बीमार थे, इसके बावजूद उनसे वार्ड में ड्यूटी कराई गई।

कुछ रिपोर्टों में छात्रों की ओर से मेडिकल लीव और अटेंडेंस को लेकर भी शिकायतों का उल्लेख किया गया है। प्रदर्शनकारी छात्रों का दावा है कि उन्होंने पहले भी इन समस्याओं को उठाया था, लेकिन उनकी शिकायतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

प्रशासन की जांच पर टिकी नजर

दिव्यांशी की मौत को लेकर परिवार की ओर से भी उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। 25 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, उनकी मां ने प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी।

दूसरी तरफ KGMU प्रशासन की ओर से कहा गया है कि मामले की जांच कराई जा रही है। ऐसे में छात्रों के आरोप, परिवार की मांग और विश्वविद्यालय के पक्ष के बीच अब जांच की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।

प्रिंसिपल के इस्तीफे के बाद भी नहीं थमा विवाद

छात्रों के आंदोलन के दौरान नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल सूचना राय भौमिक के इस्तीफे की जानकारी सामने आई थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी छात्रों ने डीन के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग जारी रखी।

छात्रों का कहना है कि केवल एक अधिकारी के इस्तीफे से उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं। वे जिम्मेदारी तय करने और नर्सिंग कॉलेज की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग कर रहे हैं।

KGMU में दिव्यांशी यादव की मौत के बाद शुरू हुआ नर्सिंग छात्रों का विवाद अब डीन के खिलाफ कार्रवाई और लिखित इस्तीफे की मांग तक पहुंच गया है। छात्रों का आरोप है कि पहले दिए गए आश्वासन के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। वहीं विश्वविद्यालय मामले की जांच की बात कह रहा है। अब आंदोलन और जांच दोनों के बीच यह देखना अहम होगा कि प्रशासन छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और दिव्यांशी की मौत से जुड़े आरोपों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

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