दिल्ली-NCR में अक्टूबर से पहले प्रदूषण पर तैयारी तेज, इस बार हवा बिगड़ने से पहले एक्शन

दिल्ली-NCR में सर्दियों की जहरीली हवा का इंतजार करने के बजाय इस बार पहले से तैयारी शुरू हो गई है। सड़क की धूल, ट्रैफिक, निर्माण, उद्योग और पराली जैसे स्रोतों पर एक साथ काम करने की कोशिश है, ताकि प्रदूषण बढ़ने के बाद नहीं, उससे पहले हालात संभाले जा सकें।
अक्टूबर से पहले क्यों सक्रिय हुआ सिस्टम?
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण किसी एक वजह से नहीं बढ़ता। सड़क की धूल, वाहनों का उत्सर्जन, निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाला मलबा, औद्योगिक धुआं और खुले में कचरा जलाना कई स्रोत हैं। सर्दियों में मौसम की परिस्थितियां भी प्रदूषकों को जमीन के करीब रोक सकती हैं। इसलिए इस बार सर्दियों से पहले ही तैयारियों पर जोर दिया जा रहा है।
सड़क की धूल पर मैकेनिकल सफाई
रोड डस्ट को कम करने के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों की तैनाती बढ़ाने पर जोर है। CAQM ने फरवरी 2026 में NCR में इन मशीनों के इस्तेमाल के लिए तकनीकी और परिचालन मानक जारी किए थे। आयोग के मुताबिक सड़क की धूल PM10 का प्रमुख और PM2.5 का भी महत्वपूर्ण स्रोत है।
दिल्ली में भी सितंबर तक अतिरिक्त मशीनों की तैनाती और डीप क्लीनिंग पर जोर दिया गया है।
पराली कम हुई, फिर भी चुनौती बाकी
पराली जलाने की घटनाओं में पिछले वर्षों में कमी आई है, लेकिन दिल्ली-NCR के प्रदूषण की समस्या सिर्फ पराली तक सीमित नहीं है। इसी वजह से 2026 के लिए पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत संबंधित राज्यों में पराली रोकने की तैयारियों की भी समीक्षा की जा रही है।
यानी फसल अवशेष पर नियंत्रण के साथ स्थानीय प्रदूषण स्रोतों को रोकना भी जरूरी है।

अब AQI के पीछे का स्रोत भी तलाशा जाएगा
सिर्फ AQI देखकर यह समझना मुश्किल है कि किसी इलाके में प्रदूषण अचानक क्यों बढ़ा। इसलिए निगरानी और ऑन-ग्राउंड निरीक्षण पर जोर बढ़ाया जा रहा है। CAQM की जांच में दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद समेत NCR के कई हिस्सों में सड़क की धूल और निर्माण मलबे से जुड़ी कमियां सामने आई हैं।
यही जानकारी आगे कार्रवाई तय करने में मदद कर सकती है।
GRAP का मकसद भी पहले कार्रवाई
GRAP यानी Graded Response Action Plan में प्रदूषण की स्थिति के अनुसार चरणबद्ध कदम उठाए जाते हैं। 2026 में CAQM ने मौसम और एयर-क्वालिटी पूर्वानुमानों को देखते हुए GRAP के चरण लागू किए हैं।
यानी कोशिश यही है कि सिस्टम केवल AQI खराब होने के बाद प्रतिक्रिया न दे, बल्कि संभावित गिरावट को देखते हुए समय रहते तैयार रहे।
असली परीक्षा मशीनों से आगे
सड़कें साफ करने वाली मशीनें, मॉनिटरिंग सिस्टम और GRAP जरूरी हैं, लेकिन अकेले इनके भरोसे दिल्ली की हवा नहीं बदल सकती। अगर सफाई के बाद फिर धूल जमा होती रहे, निर्माण सामग्री खुले में पड़ी रहे, कचरा जलता रहे और वाहनों का उत्सर्जन बढ़ता रहे, तो समस्या लौट आएगी।
CAQM की हालिया समीक्षा में भी सड़कों पर दोबारा धूल जमा होने, अधूरी पक्की सतह और कूड़ा फैलने जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया गया है।
दिल्ली-NCR की हवा अक्टूबर में अचानक खराब नहीं होती। उसके पीछे महीनों से बन रहे कई कारण होते हैं। इसलिए इस बार असली कसौटी यह होगी कि प्रदूषण बढ़ने के बाद कितनी कार्रवाई हुई नहीं, बल्कि बढ़ने से पहले कितना प्रदूषण रोका गया
