राज्य

सुपौल में आंगनबाड़ी केंद्रों से कथित वसूली का आरोप, वायरल वीडियो के बाद जांच के आदेश

सुपौल के छातापुर में आंगनबाड़ी केंद्रों से कथित मासिक वसूली के आरोप ने ICDS विभाग को सवालों के घेरे में ला दिया है। 2,600 रुपये के कथित लेन-देन का वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने मामले में जांच के निर्देश दिए हैं, जबकि संबंधित पर्यवेक्षिका ने अलग कहानी बताई है।

2600 रुपये की कथित वसूली का आरोप

मामला जीवछपुर पंचायत स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-52 से जुड़ा है। सेविका ममता कुमारी ने आरोप लगाया कि केंद्र से जुड़े वाउचर भुगतान, टेक होम राशन (THR), क्रय पंजी और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर हर महीने 2,600 रुपये मांगे जाते थे। उन्होंने दो महीने के वाउचर पास कराने के लिए अतिरिक्त 10 हजार रुपये मांगने का भी आरोप लगाया है।

वायरल वीडियो ने बढ़ाई हलचल

मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसमें एक महिला सुपरवाइजर के रुपये गिनने का दावा किया जा रहा है। वीडियो में 2,600 रुपये की जगह 2,400 रुपये होने और 200 रुपये कम होने जैसी बातचीत सुनाई देने की बात कही गई है।

हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो में दिखाई दे रही रकम किस उद्देश्य से दी या ली जा रही थी। इसलिए वायरल वीडियो को अपने आप में आरोपों का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता।

सुपौल में आंगनबाड़ी केंद्रों से कथित वसूली का आरोप, वायरल वीडियो के बाद जांच के आदेश

सुपरवाइजर ने दी अलग सफाई

वीडियो में दिखाई दे रही महिला की पहचान सोशल मीडिया पर छातापुर की महिला पर्यवेक्षिका संगीता कुमारी के रूप में बताई जा रही है। संगीता कुमारी ने कथित वसूली के आरोपों से अलग अपनी सफाई दी है।

उनके मुताबिक, उनकी प्रतापगंज में जयगुरु मेडिकल हॉल नाम से दवा दुकान है। उनका दावा है कि छातापुर के एक ग्राहक ने डॉक्टर से इलाज कराने के बाद उनकी दुकान से करीब 2,600 रुपये की दवाएं ली थीं और उसी बकाया रकम का भुगतान करने के लिए वह ICDS कार्यालय आया था।

अब प्रशासन ने क्या किया?

वायरल वीडियो सामने आने के बाद मामला जिला प्रशासन तक पहुंचा। रिपोर्टों के मुताबिक, सुपौल के डीएम सावन कुमार ने महिला पर्यवेक्षिका संगीता कुमारी को छातापुर CDPO कार्यालय से हटाकर जिला प्रोग्राम कार्यालय, ICDS, सुपौल में योगदान देने का निर्देश दिया है। साथ ही मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।

यह कदम जांच पूरी होने तक प्रशासनिक स्तर पर उठाया गया है; इससे आरोप साबित होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

जांच में किन सवालों के जवाब जरूरी?

अब जांच में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही होंगे कि वीडियो में दिखाई दे रही रकम किसकी थी, किस उद्देश्य से दी गई और कार्यालय में उसका लेन-देन क्यों हुआ। साथ ही सेविका द्वारा लगाए गए मासिक वसूली के आरोपों और अतिरिक्त रकम की मांग के दावे की भी जांच जरूरी होगी।

सुपौल जिला प्रशासन की वेबसाइट पर आंगनबाड़ी से जुड़े अपील मामलों के रिकॉर्ड पहले से उपलब्ध हैं, जिससे यह भी स्पष्ट है कि ICDS व्यवस्था से संबंधित विवादों पर औपचारिक प्रशासनिक प्रक्रिया मौजूद है।

आरोप और जांच के बीच सच

फिलहाल इस पूरे मामले में दो अलग-अलग दावे सामने हैं—एक तरफ सेविका कथित मासिक वसूली का आरोप लगा रही हैं, दूसरी तरफ पर्यवेक्षिका वायरल रकम को दवा की बकाया राशि बता रही हैं। अब जांच और उपलब्ध दस्तावेज ही तय करेंगे कि वास्तविकता क्या है।

आंगनबाड़ी केंद्रों की राशि सीधे बच्चों के पोषण और केंद्रों के संचालन से जुड़ी होती है। इसलिए सवाल सिर्फ एक वायरल वीडियो का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही का भी है। जांच का निष्कर्ष ही बताएगा कि 2,600 रुपये की यह कहानी आरोप थी या इसके पीछे कोई वास्तविक अनियमितता।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button