अनशन के 20वें दिन अस्पताल पहुंचे सोनम वांगचुक, सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला

लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर पर जारी उनके अनशन के 20वें दिन दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस का कहना है कि लंबे समय से भूख हड़ताल पर रहने के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया गया। वहीं, इस घटनाक्रम के बीच उनके समर्थन में सुप्रीम कोर्ट को एक पत्र याचिका भेजी गई है, जिसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की सुरक्षा और पुलिस को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
पत्र याचिका में क्या-क्या मांगें की गईं?
सुप्रीम कोर्ट को भेजी गई पत्र याचिका में कहा गया है कि सोनम वांगचुक और अन्य शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल जारी रखने की अनुमति देने संबंधी उचित निर्देश दिए जाएं।

प्रदर्शन स्थल पर चिकित्सा सुविधाओं की भी मांग
याचिका में यह भी आग्रह किया गया है कि प्रदर्शन स्थल पर पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसमें योग्य डॉक्टरों की तैनाती, आपातकालीन चिकित्सा उपकरण, आवश्यक दवाएं और नियमित स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है, ताकि अनशन पर बैठे लोगों की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा सके।
पुलिस कार्रवाई और रिहाई को लेकर भी उठी मांग
पत्र याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया गया है कि दिल्ली पुलिस को शांतिपूर्ण प्रदर्शन में अनावश्यक हस्तक्षेप या अत्यधिक बल प्रयोग से बचने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही, यदि किसी भी स्तर पर सोनम वांगचुक को गैर-कानूनी रूप से हिरासत में पाया जाता है, तो कानून के अनुरूप उचित आदेश जारी करने और उन्हें निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर वापस जाने की सुविधा उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है।
दिल्ली पुलिस का क्या कहना है?
दिल्ली पुलिस के अनुसार, सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य कारणों से एक सुनियोजित और शांतिपूर्ण कार्रवाई के तहत अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस का कहना है कि यह कदम उनकी सुरक्षा और चिकित्सकीय देखभाल को ध्यान में रखते हुए उठाया गया। साथ ही, प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर का स्थल खाली करने की अपील भी की गई है।
सोनम वांगचुक के अनशन और उन्हें अस्पताल ले जाने की कार्रवाई के बाद मामला अब न्यायिक और संवैधानिक विमर्श का विषय बन गया है। एक ओर पुलिस स्वास्थ्य सुरक्षा को कार्रवाई का आधार बता रही है, वहीं दूसरी ओर पत्र याचिका के माध्यम से शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की मांग सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी गई है। अब इस मामले में न्यायालय की संभावित प्रतिक्रिया और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।
