संभल में सरकारी जमीन के फर्जी पट्टा आवंटन मामले में बड़ा एक्शन, पूर्व SDM-तहसीलदार समेत 6 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में सरकारी भूमि के कथित फर्जी पट्टा आवंटन मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। करीब छह साल पुराने इस प्रकरण में तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों, राजस्व कर्मियों और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। शुरुआती कार्रवाई में पूर्व एसडीएम, पूर्व तहसीलदार समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
छह साल पुराने मामले में कार्रवाई
संभल पुलिस ने गुन्नौर तहसील क्षेत्र में सरकारी भूमि के कथित फर्जी आवंटन मामले में कार्रवाई करते हुए तत्कालीन SDM ओमबीर सिंह, तत्कालीन तहसीलदार कर्म सिंह, एक सरकारी अधिवक्ता और अन्य राजस्व कर्मियों सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि सरकारी भूमि के आवंटन में धोखाधड़ी और नियमों का उल्लंघन किया गया।
लेखपाल की शिकायत के बाद दर्ज हुई FIR
यह कार्रवाई वर्तमान लेखपाल स्वाती शर्मा की शिकायत और जिलाधिकारी को सौंपी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई। पुलिस ने इस मामले में तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, तीन लेखपाल, दो कानूनगो, एक चकबंदी अधिकारी, छह ग्राम पंचायत सदस्यों सहित कुल 19 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जांच में क्या सामने आया?
प्रारंभिक जांच के अनुसार, गुन्नौर तहसील के भोना नगला गांव के सुखोला क्षेत्र की सरकारी भूमि की श्रेणी में कथित रूप से फर्जी बदलाव किया गया। आरोप है कि झाऊ श्रेणी की सरकारी भूमि को रिकॉर्ड में रेत श्रेणी दिखाकर 58 अपात्र लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए।

जांच में यह भी दावा किया गया कि पहले आवंटन निरस्त होने के बावजूद कथित मिलीभगत से दोबारा रिकॉर्ड में बदलाव कर भूमि का अवैध आवंटन किया गया।
जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट बनी आधार
सरकारी भूमि आवंटन में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद गठित जांच समिति ने 4 जून 2026 को अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी थी। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई तेज की और आरोपियों की गिरफ्तारी की।
जांच अभी जारी
पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है। रिकॉर्ड, राजस्व दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
संभल का यह मामला सरकारी भूमि के प्रबंधन और राजस्व रिकॉर्ड की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
