
हरियाणा में अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे सफाई, सीवर और फायर कर्मचारियों ने सोमवार को पानीपत में उग्र प्रदर्शन किया। नगर पालिका कर्मचारी संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में कर्मचारी संविधान चौक पहुंचे।
प्रदर्शनकारियों ने कूड़े से भरा एक डंपर सड़क पर लाकर खड़ा किया और उसमें मौजूद कूड़ा मुख्य मार्ग पर ही उड़ेल दिया। कुछ ही देर में सड़क पर कूड़े का बड़ा ढेर जमा हो गया और आसपास दुर्गंध फैल गई।
GT रोड पर लगा भारी जाम
मुख्य सड़क पर कूड़ा फैलने के कारण पानीपत के व्यस्त GT रोड पर यातायात प्रभावित हो गया। वाहनों की रफ्तार थम गई और देखते ही देखते लंबा जाम लग गया।
राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद यातायात व्यवस्था को सामान्य कराया। इसके बाद प्रदर्शनकारी कर्मचारी नारेबाजी करते हुए नगर निगम कार्यालय की ओर बढ़ गए।
18 अगस्त तक बढ़ाई हड़ताल
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने अपनी प्रदेशव्यापी हड़ताल को 18 अगस्त तक बढ़ाने का ऐलान किया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि 13 मई 2026 को सरकार के साथ उनकी मांगों को लेकर समझौता हुआ था, लेकिन कई महीने गुजरने के बावजूद उसे लागू नहीं किया गया।

कर्मचारियों के अनुसार वे इसी कथित वादाखिलाफी के विरोध में 6 अगस्त से हड़ताल पर हैं।
18 अगस्त को ‘विश्वासघात दिवस’
कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 18 अगस्त को पूरे हरियाणा में ‘विश्वासघात दिवस’ मनाया जाएगा।
उनका कहना है कि यह कार्यक्रम सरकार को 13 मई के समझौते की याद दिलाने और लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेने के दबाव के तौर पर आयोजित किया जाएगा।
क्या हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें?
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में वर्षों से काम कर रहे कच्चे कर्मचारियों को नियमित करना और खाली पदों पर नियमित भर्ती शामिल है। इसके अलावा 13 मई के समझौते को तत्काल लागू करने की मांग भी की जा रही है।
आर्थिक सुरक्षा के लिए कर्मचारी न्यूनतम 15,200 रुपये वेतन और 5,000 रुपये जोखिम भत्ते की मांग कर रहे हैं। इसके साथ गुरुग्राम नगर निगम से हटाए गए 3,480 कर्मचारियों की बहाली और नगर निकायों के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग भी प्रमुख है।
सरकार के सामने बढ़ी चुनौती
सफाई और सीवर व्यवस्था सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी है। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाली हड़ताल का असर शहरों की सफाई व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। पानीपत में सड़क पर कूड़ा डालने जैसी कार्रवाई ने आंदोलन की तीव्रता जरूर दिखा दी है, लेकिन इससे आम लोगों की परेशानी भी बढ़ी।
