हरियाणा के 84 लाख बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, 1,134 करोड़ रुपये की FSA वसूली नहीं होगी

चंडीगढ़: हरियाणा के करीब 84 लाख बिजली उपभोक्ताओं से जुड़ी फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट (FSA) की 1,134.54 करोड़ रुपये की प्रस्तावित वसूली का मामला राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है। एचईआरसी के समक्ष बिजली वितरण निगमों ने इस राशि को उपभोक्ताओं से वसूलने की अनुमति मांगी थी। मामले में पूर्व मंत्री एवं INLD के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. संपत सिंह ने इसका विरोध किया था। अगस्त में इस याचिका पर एचईआरसी की अंतिम सुनवाई पूरी हो चुकी थी।
बिजली निगमों ने मांगी थी 1,134.54 करोड़ की वसूली
उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVNL) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVNL) ने 2025-26 के लिए 47 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से FPPAS की वसूली का प्रस्ताव रखा था। निगमों ने एचईआरसी से नियमों में राहत देकर 1,134.54 करोड़ रुपये और उस पर कैरीइंग कॉस्ट आने वाले वर्षों में उपभोक्ताओं से वसूलने की अनुमति मांगी थी।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रस्तावित राशि का भार राज्य के करीब 84 लाख बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ सकता था।

समयसीमा को लेकर उठा बड़ा सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान उपभोक्ता पक्ष की ओर से यह तर्क रखा गया कि FPPAS की वसूली निर्धारित समयसीमा में नहीं होने पर निगमों का रिकवरी अधिकार समाप्त हो जाता है।
एचईआरसी के 2024 के नियमों में कहा गया है कि FPPAS को निर्धारित समय में गणना कर वसूलना होता है। यदि वितरण कंपनी निर्धारित समयसीमा में इसे वसूलने में विफल रहती है और मामला फोर्स मेज्योर का नहीं है, तो संबंधित लागत की रिकवरी का अधिकार जब्त हो सकता है।
950.09 करोड़ रुपये को लेकर भी विवाद
सुनवाई में बिजली निगमों की ओर से कथित तौर पर यह स्वीकार किया गया कि 1,134.54 करोड़ रुपये की मांग में करीब 950.09 करोड़ रुपये यानी लगभग 84 प्रतिशत राशि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ी पिछली देनदारियों से संबंधित है।
इसमें ट्रांसमिशन चार्ज, लेट पेमेंट सरचार्ज और सप्लीमेंट्री बिल जैसी देनदारियां शामिल होने की बात सामने आई। उपभोक्ता पक्ष ने सवाल उठाया कि इनमें से कुछ राशि वित्त वर्ष 2022-23 से संबंधित है और इसे निर्धारित समयसीमा के भीतर वसूल किया जाना चाहिए था।
संपत सिंह ने किया था निगमों की मांग का विरोध
पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने एचईआरसी के समक्ष बिजली निगमों की मांग का विरोध किया था। उनका कहना था कि निगम अपनी देरी या प्रशासनिक कमियों का आर्थिक बोझ आम उपभोक्ताओं पर नहीं डाल सकते।
सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि जब FSA की गणना उपभोक्ताओं के पक्ष में रही, तब बिजली निगमों ने उसी तरह सक्रियता नहीं दिखाई। उन्होंने 2021 के बाद कथित तौर पर उपभोक्ताओं को मिलने वाले नकारात्मक FSA के लाभ का मुद्दा भी उठाया।
निगमों के पुराने FSA की भी स्थिति
एचईआरसी के एक आधिकारिक आदेश में UHBVNL के FSA आंकड़ों के अनुसार 30 सितंबर 2025 तक वित्त वर्ष 2022-23 के लिए उपभोक्ताओं से 768.08 करोड़ रुपये, 2023-24 के लिए 1,301.87 करोड़ रुपये और 2024-25 के लिए 579.48 करोड़ रुपये की नेट राशि बकाया दिखाई गई थी। उसी दस्तावेज में वित्त वर्ष 2022-23 का FSA 47 पैसे प्रति यूनिट की दर से लगाए जाने का उल्लेख है।
अब आगे क्या होगा?
एफएसए विवाद का सीधा असर बिजली बिलों पर पड़ सकता है, इसलिए एचईआरसी की भूमिका महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित 1,134.54 करोड़ रुपये की वसूली को लेकर निगमों और उपभोक्ता पक्ष के बीच मुख्य विवाद नियमों की समयसीमा, पिछली देनदारियों और उन्हें वर्तमान उपभोक्ताओं से वसूलने की अनुमति से जुड़ा है।
साथ ही, आने वाले वित्तीय वर्ष की टैरिफ प्रक्रिया में फिक्स्ड चार्ज, बिजली दरों और अन्य शुल्कों का मुद्दा भी उपभोक्ता संगठनों और बिजली निगमों के बीच महत्वपूर्ण रहेगा।
