
उज्जैन के महाकाल मंदिर में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब श्रीनागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए लगी कतार में करंट फैलने की अफवाह तेजी से फैल गई। हरसिद्धि मंदिर चौराहे के पास अचानक भगदड़ जैसी स्थिति बनी। बैरिकेडिंग के बीच फंसे कई श्रद्धालु घायल हो गए और उन्हें इलाज के लिए चरक अस्पताल पहुंचाया गया।
अचानक फैली अफवाह, भीड़ में मची दहशत
श्रीनागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए श्रद्धालु रात से ही कतार में लगे थे। सोमवार को भीड़ काफी ज्यादा थी। इसी दौरान बैरिकेडिंग के अंदर डीपी के पास करंट फैलने की अफवाह ने लोगों को डरा दिया। लोग सुरक्षित जगह की ओर भागने लगे और देखते ही देखते भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
बैरिकेड के नीचे फंसे श्रद्धालु
घायलों में उज्जैन, ग्वालियर, बिहार, गुजरात और अन्य स्थानों से आए श्रद्धालु शामिल हैं। हरिश्चंद्र के पैरों में बैरिकेड से टकराने के कारण गंभीर चोट आई। वहीं सागर नाम के युवक के दोनों पैर बैरिकेड के नीचे फंस गए। वह किसी तरह एक पैर निकाल पाया, जबकि दूसरे पैर में गंभीर चोट आई।

‘आधे घंटे तक सड़क पर पड़ा रहा’
घायल सागर ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उसका कहना है कि भगदड़ के बाद वह करीब आधे घंटे तक सड़क पर पड़ा रहा और मदद के लिए पुलिसकर्मियों से भी गुहार लगाता रहा। उसके अनुसार, बाद में एक बाहरी व्यक्ति ने उसे उठाकर स्वास्थ्य शिविर तक पहुंचाया। इसके करीब आधे घंटे बाद एंबुलेंस आई।
रात से कतार में खड़े थे श्रद्धालु
सागर की मां मीनू के मुताबिक, उनका बेटा रात करीब एक बजे नागचंद्रेश्वर मंदिर की लाइन में लगा था। लंबा सफर तय करके पहुंचे श्रद्धालुओं को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ा। आरती के समय श्रद्धालुओं को रोक दिया गया था। बाद में अचानक गेट खुलने पर भीड़ आगे बढ़ी और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इसी दौरान टेंट और बैरिकेड भी गिर गए।
VIP दर्शन को लेकर भी उठे सवाल
पीड़ित ने दावा किया कि सामान्य श्रद्धालुओं को घंटों इंतजार करना पड़ रहा था, जबकि VIP दर्शन के लिए अलग व्यवस्था थी। उसने 300 रुपये की रसीद के जरिए VIP दर्शन कराए जाने की बात भी कही। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
प्रशासन ने संभाली स्थिति
घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया। कुछ समय तक दर्शन व्यवस्था प्रभावित रही, लेकिन बाद में इसे सामान्य कर दिया गया। सभी घायलों का चरक अस्पताल में उपचार जारी है।
महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए यह घटना भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की गंभीर जरूरत को सामने लाती है। आस्था के ऐसे बड़े केंद्रों पर एक अफवाह भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था में छोटी सी चूक भी भारी पड़ सकती है।
