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वंदे मातरम् विवाद पर मोहन यादव का बड़ा हमला, सोनिया और राहुल गांधी से देश से माफी मांगने की मांग की

स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर राष्ट्रगीत के अपमान का आरोप लगाते हुए माफी की मांग की, जबकि कांग्रेस ने पूरे मामले पर अलग सफाई दी है।

मोहन यादव ने लगाए गंभीर आरोप

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी को लेकर तीखा बयान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण गाए जाने पर आपत्ति जताई गई और राष्ट्रगीत के गायन को बाधित किया गया।

यादव ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन की भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके मुताबिक, देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले अनेक स्वतंत्रता सेनानियों के लिए यह गीत प्रेरणा का स्रोत रहा।

उन्होंने कहा कि जो लोग इस कथित अपमान में शामिल रहे हैं, उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए।

कांग्रेस मुख्यालय में क्या हुआ?

15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया गया था। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कई वरिष्ठ नेता कार्यक्रम में मौजूद थे।

वंदे मातरम् विवाद पर मोहन यादव का बड़ा हमला, सोनिया और राहुल गांधी से देश से माफी मांगने की मांग की

ध्वजारोहण के बाद ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण गाया गया। इसी दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें सोनिया गांधी को खड़गे की ओर इशारा करते हुए देखा गया। राहुल गांधी भी कुछ इशारा करते नजर आए।

वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं ने दावा किया कि सोनिया गांधी ने पूरे संस्करण के गायन पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, इस दावे की व्याख्या को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद हैं।

जयराम रमेश ने दी अलग सफाई

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बीजेपी के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण गाया गया था।

रमेश के अनुसार, सोनिया गांधी का इशारा राष्ट्रगीत के विरोध में नहीं था। उनका दावा है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे काफी देर से खड़े थे और सोनिया गांधी उनके लिए कुर्सी लाने के लिए कह रही थीं।

यानी कांग्रेस का कहना है कि वीडियो में दिखाई देने वाले इशारे को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।

‘वंदे मातरम्’ का ऐतिहासिक महत्व

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में विशेष स्थान रखता है। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी 1950 को कहा था कि स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले इस गीत को ‘जन गण मन’ के समान सम्मान दिया जाना चाहिए।

इसी ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2026 में ‘वंदे मातरम्’ को कानूनी संरक्षण देने वाला संशोधन भी आगे बढ़ाया।

अब ‘वंदे मातरम्’ को मिला कानूनी संरक्षण

‘Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026’ को संसद के दोनों सदनों ने पारित किया। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी विधेयक को मंजूरी दे दी, जिससे ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान के समान वैधानिक संरक्षण मिला।

कानून के तहत जानबूझकर राष्ट्रगीत के गायन को रोकना या उसके गायन में व्यवधान डालना दंडनीय है। ऐसे अपराध में तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

हालांकि, किसी खास व्यक्ति ने कानून का उल्लंघन किया या नहीं, यह केवल वीडियो या राजनीतिक आरोपों से तय नहीं होता; इसके लिए संबंधित तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया की जरूरत होगी।

बीजेपी-कांग्रेस में बढ़ी सियासी तकरार

‘वंदे मातरम्’ को लेकर विवाद अब केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा। बीजेपी इसे राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस आरोपों को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगा रही है।

इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि पार्टी ने राष्ट्रगीत का अपमान किया। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज किया है।

एक वीडियो ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी

स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर हुए कार्यक्रम का एक छोटा-सा वीडियो अब बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। एक तरफ बीजेपी नेता इसे राष्ट्रगीत के अपमान के तौर पर देख रहे हैं, वहीं कांग्रेस का कहना है कि वीडियो की गलत व्याख्या की जा रही है।

अब इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि कार्यक्रम में वास्तव में क्या हुआ था। राजनीतिक आरोपों से अलग तथ्य, पूरा वीडियो और संबंधित पक्षों की आधिकारिक जानकारी ही यह तय कर सकती है कि विवाद की वास्तविकता क्या है।

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