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दिग्विजय के हटते ही राज्यसभा सीट पर कमलनाथ का नाम सबसे आगे आया

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एकमात्र कांग्रेस सीट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के चुनावी दौड़ से खुद को अलग करने के बाद अब पार्टी के भीतर नए चेहरे को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मुख्यमंत्री Kamal Nath के नाम की हो रही है। हाल ही में उनकी दिल्ली यात्रा और कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge से मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की तीन सीटों पर मतदान होना है। इनमें दो सीटों पर बीजेपी की स्थिति मजबूत मानी जा रही है जबकि कांग्रेस के खाते में केवल एक सीट आती दिखाई दे रही है। ऐसे में यह सीट कांग्रेस के लिए सिर्फ एक चुनाव नहीं बल्कि प्रतिष्ठा और संगठनात्मक ताकत की परीक्षा बन गई है। पार्टी नेतृत्व अब ऐसे चेहरे की तलाश में जुटा है जो विधायकों को एकजुट रखने के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी मजबूत तरीके से दे सके।

कमलनाथ का नाम क्यों सबसे आगे

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो पार्टी आलाकमान के पास कई नामों की सूची मौजूद है। इसमें राष्ट्रीय स्तर के नेताओं से लेकर प्रदेश के वरिष्ठ चेहरों तक पर मंथन चल रहा है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में Kamal Nath सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। वजह साफ है। प्रदेश कांग्रेस में उनकी पकड़ आज भी मजबूत मानी जाती है और कई विधायक खुलकर उनके समर्थन में दिखाई देते हैं। 2024 लोकसभा चुनाव के बाद से कमलनाथ को संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली थी। ऐसे में माना जा रहा है कि राज्यसभा उनकी सक्रिय राजनीतिक वापसी का मंच बन सकती है। दूसरी तरफ कांग्रेस यह भी चाहती है कि ऐसा उम्मीदवार मैदान में उतरे जो पार्टी के भीतर किसी तरह की नाराजगी या बगावत को रोक सके। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर कांग्रेस किसी बाहरी चेहरे पर दांव लगाती है तो पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ सकता है। यही वजह है कि अनुभवी और संतुलित चेहरे के तौर पर कमलनाथ का नाम सबसे आगे दिखाई दे रहा है।

दिग्विजय के हटते ही राज्यसभा सीट पर कमलनाथ का नाम सबसे आगे आया

कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती

हालांकि कांग्रेस के लिए यह मुकाबला आसान नहीं माना जा रहा है। विधानसभा में पार्टी का संख्या बल सीमित है और कुछ विधायकों की स्थिति भी अनिश्चित बनी हुई है। बताया जा रहा है कि दो विधायक फिलहाल मतदान की स्थिति में नहीं हैं जबकि एक अन्य विधायक का मामला अदालत में लंबित है। ऐसे में कांग्रेस को अपने सभी विधायकों को एकजुट रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत है और कांग्रेस बेहद मामूली बढ़त पर खड़ी दिखाई दे रही है। इसी वजह से पार्टी हाईकमान कोई भी जोखिम लेने के मूड में नहीं है। दूसरी तरफ बीजेपी लगातार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। बीजेपी नेताओं का मानना है कि अगर कांग्रेस के भीतर अंदरूनी खींचतान बढ़ती है या क्रॉस वोटिंग होती है तो तीसरी सीट का मुकाबला बेहद दिलचस्प हो सकता है। यही कारण है कि मध्य प्रदेश की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई है और दोनों दल अपने-अपने विधायकों को साधने में जुट गए हैं।

फैसले पर टिकी सबकी निगाहें

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस आखिर किस चेहरे पर भरोसा जताएगी। क्या पार्टी अनुभव और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए Kamal Nath को राज्यसभा भेजेगी या फिर राष्ट्रीय राजनीति को साधने के लिए किसी नए चेहरे को मौका देगी। फिलहाल दिल्ली से लेकर भोपाल तक राजनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है। कांग्रेस के भीतर कई नेता सक्रिय हो चुके हैं और लॉबिंग भी तेज बताई जा रही है। उधर बीजेपी भी किसी राजनीतिक मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहती। आने वाले कुछ दिन मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं। राज्यसभा चुनाव के जरिए न सिर्फ राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन होगा बल्कि यह भी तय होगा कि प्रदेश कांग्रेस में भविष्य की कमान किस नेता के हाथों में मजबूत होती है। अब सबकी नजर कांग्रेस हाईकमान के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।

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