PMCH विवाद पर सियासत तेज, RJD बोली- स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे, JDU ने किया पलटवार

बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच (PMCH) के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह और स्वास्थ्य मंत्री निशांत के बीच शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं।
RJD ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल
RJD प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह के आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय टकराव का सबसे ज्यादा नुकसान मरीजों को उठाना पड़ेगा। एजाज अहमद ने कहा कि हालिया घटनाक्रम यह दिखाता है कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे चल रही है।
JDU ने किया सरकार का बचाव
JDU प्रवक्ता अंजुम आरा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्री निशांत जब पीएमसीएच के निरीक्षण के लिए पहुंचे, तब अस्पताल के प्रिंसिपल बिना किसी सूचना के अनुपस्थित थे। उन्होंने दावा किया कि मंत्री द्वारा कई बार फोन किए जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। उनके मुताबिक, कार्रवाई के बाद अब डॉ. एनपी सिंह खुद को पीड़ित बताने की कोशिश कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?
23 जून को स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने पीएमसीएच का औचक निरीक्षण किया था। विभाग का कहना है कि निरीक्षण की सूचना अस्पताल प्रशासन को एक दिन पहले ही दे दी गई थी। आरोप है कि इसके बावजूद तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह बिना अनुमति अनुपस्थित रहे और बाद में उनके बेटे की ओर से उनके घायल होने की जानकारी दी गई।
जांच के दौरान जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया कि डॉ. सिंह कथित तौर पर अपने निजी क्लिनिक में मरीज देख रहे थे। इसके बाद उन्हें पीएमसीएच के प्रिंसिपल के अतिरिक्त प्रभार से हटाकर राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बेतिया में पदस्थापित कर दिया गया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उठाए गंभीर आरोप
शुक्रवार को पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने विभागीय कार्रवाई को तानाशाही करार दिया। उन्होंने अपने खिलाफ की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए और इसे अनुचित बताया। वहीं सरकार का कहना है कि सरकारी सेवा में अनुशासन सर्वोपरि है और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई स्वाभाविक है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच मरीजों की चिंता
PMCH जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में प्रशासनिक विवाद ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर विपक्ष इसे स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता बता रहा है, वहीं सरकार नियमों के पालन और जवाबदेही पर जोर दे रही है। अब यह देखना होगा कि विभागीय जांच और आगे की कार्रवाई इस विवाद को किस दिशा में ले जाती है।
