
जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच आज का दिन अहम माना जा रहा है। एक ओर दिल्ली हाईकोर्ट मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा, वहीं दूसरी ओर CJP और केंद्र सरकार के बीच बातचीत का नया दौर शुरू होने जा रहा है।
इंटरनेट बंदी के आदेश पर हाईकोर्ट में सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट आज उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने के केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा है कि आंदोलन के दौरान इंटरनेट सेवा निलंबित करना नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित करता है।
प्रतिबंधों को भी दी गई चुनौती
याचिका में केवल इंटरनेट बंदी ही नहीं, बल्कि प्रदर्शन स्थल के आसपास लगाए गए अन्य प्रतिबंधों को भी चुनौती दी गई है। इसमें कहा गया है कि टेलीकॉम कंपनियों को मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवा निलंबित करने का निर्देश दिया गया था, जिससे आम लोगों और प्रदर्शनकारियों दोनों को परेशानी हुई।

CJP और सरकार के बीच होगी बातचीत
आज दोपहर 12:30 बजे कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में CJP और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के बीच बैठक प्रस्तावित है। इससे पहले सरकार ने कई बार बातचीत का प्रस्ताव दिया था, लेकिन CJP ने जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थान पर वार्ता की मांग की थी। इसके बाद कॉन्स्टिट्यूशन क्लब को बैठक के लिए चुना गया।
समाधान की उम्मीद
माना जा रहा है कि इस बैठक में छात्र आंदोलन और प्रदर्शन को लेकर कोई समाधान निकल सकता है। दोनों पक्षों के बीच बातचीत को आंदोलन के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पेपर लीक कानून पर सरकार की तैयारी
इस बीच केंद्र सरकार पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून लाने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश जारी कर छात्रों को भरोसा दिलाया है कि सरकार पेपर लीक रोकने के लिए कठोर दंड का प्रावधान करने वाला कानून लाएगी। प्रस्तावित विधेयक पर कैबिनेट की मंजूरी और अगले सप्ताह संसद में पेश किए जाने की संभावना जताई गई है।
जंतर-मंतर आंदोलन के बीच आज न्यायिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं। हाईकोर्ट की सुनवाई, सरकार और CJP के बीच बातचीत तथा पेपर लीक कानून को लेकर सरकार के कदम आने वाले समय की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकते हैं।
