मायावती के फैसले पर ईशान आनंद की पहली प्रतिक्रिया, बोले- 2027 में बहुमत की सरकार लक्ष्य सर्वोपरि

मायावती के उस फैसले के बाद, जिसमें उन्होंने आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त करने का ऐलान किया, अब उनके भाई ईशान आनंद की प्रतिक्रिया सामने आई है। ईशान ने बिना किसी का नाम लिए बहुजन आंदोलन में निजी और पारिवारिक हितों से ऊपर संगठन और मिशन को रखने की बात कही है।
मायावती के फैसले के बाद ईशान का संदेश
बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद को लेकर मायावती के बड़े फैसले के बाद अब उनके भाई ईशान आनंद ने पहली प्रतिक्रिया दी है। ईशान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी।
उन्होंने लिखा कि बहुजन आंदोलन किसी व्यक्ति या परिवार के भरोसे आगे नहीं बढ़ता, बल्कि त्याग, संघर्ष और विचारधारा के आधार पर मजबूत होता है। उन्होंने संगठन और मिशन के हित को व्यक्तिगत और पारिवारिक स्वार्थ से ऊपर रखने की बात कही।
‘मिशन को सर्वोच्च रखना जरूरी’
ईशान आनंद ने अपनी पोस्ट में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और मान्यवर कांशीराम के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके सपनों को साकार करने का रास्ता संगठन के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने से होकर जाता है।
उन्होंने अपने संदेश के अंत में “2027 में बहुमत की सरकार–लक्ष्य सर्वोपरि” लिखा। इस बयान को मायावती के हालिया फैसले के बाद परिवार की ओर से आई महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

मायावती ने आकाश को पार्टी से किया मुक्त
मायावती ने गुरुवार, 10 सितंबर को अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के फैसले पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने इसे ‘देर आयद, दुरुस्त आयद’ वाला कदम बताया।
इसके साथ ही मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह ‘मुक्त’ करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगर अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास का फैसला पहले लिया होता तो BSP, बहुजन समाज और आंदोलन के साथ-साथ आकाश को भी विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता।
अशोक सिद्धार्थ पर मायावती के गंभीर सवाल
मायावती ने अपने बयान में अशोक सिद्धार्थ की राजनीतिक भूमिका और उनकी नीयत पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें आकाश के भविष्य, BSP और बहुजन आंदोलन की चिंता होती तो वह पहले ही राजनीति से संन्यास ले लेते।
मायावती ने यह भी कहा कि ऐसा नहीं होने से उनकी महत्वाकांक्षा और नीयत को लेकर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, ये मायावती की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
आकाश के रीपोस्ट पर भी उठाया सवाल
BSP प्रमुख ने आकाश आनंद की ओर से अशोक सिद्धार्थ से जुड़ी उनकी बुधवार की पोस्ट को रीपोस्ट नहीं किए जाने का भी जिक्र किया। मायावती ने इसे लेकर कहा कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि सिद्धार्थ और आकाश के लिए पार्टी और आंदोलन से ज्यादा निजी और पारिवारिक संबंध महत्वपूर्ण हैं।
यही मुद्दा अब परिवार के भीतर राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर चर्चा का केंद्र बन गया है।
2027 पर नजर, संगठन के लिए बड़ी चुनौती
ईशान आनंद का बयान ऐसे समय आया है, जब BSP उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में आगामी चुनावों की तैयारी कर रही है। उनका ‘2027 में बहुमत की सरकार’ वाला संदेश बताता है कि पार्टी के भीतर संगठन और चुनावी लक्ष्य को लेकर जोर बरकरार है।
मायावती का ताजा फैसला और परिवार की ओर से आई प्रतिक्रिया BSP के लिए सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि संगठन और नेतृत्व की दिशा से जुड़ा अहम घटनाक्रम है। अब देखना होगा कि आकाश आनंद की राजनीतिक भूमिका से दूरी के बाद पार्टी 2027 के लक्ष्य के लिए अपनी रणनीति किस तरह आगे बढ़ाती है।
