राज्य

सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD के 28 लाख इमारतों वाले सर्वे पर उठे गंभीर सवाल, सात मौतों ने खोली पोल

सत्य निकेतन की संकरी गली में पांच मंजिला इमारत का गिरना सिर्फ सात जिंदगियों का दुखद अंत नहीं है। इस हादसे ने दिल्ली में अवैध निर्माण, PG सुरक्षा और जर्जर इमारतों की निगरानी व्यवस्था पर ऐसे सवाल खड़े किए हैं, जिनका जवाब अब टालना मुश्किल होगा।

सात मौतों ने फिर जगाई चिंता

दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत अचानक ढह गई। हादसे में कम से कम सात लोगों की मौत हुई, जिनमें पांच छात्र बताए जा रहे हैं। जिस जगह युवा पढ़ाई और भविष्य के सपने लेकर रह रहे थे, वही जगह कुछ ही पलों में मातम में बदल गई।

दो मंजिल की अनुमति, पांच मंजिल की इमारत

MCD के मुताबिक यह इमारत पुनर्वास कॉलोनी में करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी थी और शुरुआत में यहां ग्राउंड प्लस वन निर्माण की अनुमति थी। इसके बावजूद दशकों बाद इमारत पांच मंजिल तक पहुंच गई और उसमें लड़कों का PG चल रहा था। MCD ने कहा कि भवन का कोई स्वीकृत नक्शा नहीं था और उसके खिलाफ शिकायत भी दर्ज नहीं हुई थी।

सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD के 28 लाख इमारतों वाले सर्वे पर उठे गंभीर सवाल, सात मौतों ने खोली पोल

28 लाख इमारतों में सिर्फ 19 खतरनाक?

हादसे ने MCD के कमजोर इमारतों के सर्वे की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए हैं। अधिकारियों के अनुसार इस साल 27,84,286 इमारतों की जांच की गई और केवल 19 को खतरनाक पाया गया। जून से सितंबर के बीच अवैध निर्माण के खिलाफ तोड़फोड़, सीलिंग और नोटिस की कार्रवाई भी हुई, लेकिन सत्य निकेतन की घटना ने निगरानी तंत्र की सीमाएं उजागर कर दीं।

बाहर से जांच, अंदर की कमजोरी कौन देखे?

MCD अधिकारियों के मुताबिक सामान्य सर्वे में दरारें, झुकी दीवारें और बाहर से दिखाई देने वाले कमजोर हिस्सों को देखा जाता है। विस्तृत स्ट्रक्चरल ऑडिट आमतौर पर नहीं होता। ऐसे में सवाल उठता है कि किसी इमारत की असली मजबूती का पता केवल बाहरी निरीक्षण से कैसे चलेगा? स्थानीय लोगों ने मरम्मत कार्य और बेसमेंट में पानी जमा होने को लेकर भी आशंका जताई है।

आसपास की इमारतों पर भी कार्रवाई

हादसे के बाद आसपास की कम से कम चार इमारतों को खाली करने के नोटिस दिए गए। पास के एक लड़कियों के PG को खाली कराकर सील किया गया। MCD ने दक्षिण क्षेत्र के उपायुक्त राकेश कुमार और चार इंजीनियरों को निलंबित भी किया है। अब मजिस्ट्रेट जांच से यह पता चलना बाकी है कि इमारत कैसे गिरी और क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई।

सवाल सिर्फ एक इमारत का नहीं

सत्य निकेतन हादसा दिल्ली की पुरानी और अनधिकृत इमारतों की बड़ी समस्या की याद दिलाता है। BJP नेता विजय गोयल ने भी ऐसे निर्माणों और जर्जर संपत्तियों पर चिंता जताई है। लेकिन सात मौतों के बाद सबसे जरूरी सवाल कार्रवाई की गति का है। अगर खतरा दिखाई देने से पहले नहीं पहचाना गया, तो अगली त्रासदी रोकने के लिए दिल्ली को सिर्फ सर्वे नहीं, बल्कि भरोसेमंद और गहरी संरचनात्मक जांच की जरूरत होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button